• August 4, 2024

बच्चों की सेहत पर करोड़ों के वारे न्यारे, लेकिन असर… बेमेतरा में 32 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे कमजोर, 18 प्रतिशत बौने, 14 प्रतिशत का वजन कम

बच्चों की सेहत पर करोड़ों के वारे न्यारे, लेकिन असर… बेमेतरा में 32 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे कमजोर, 18 प्रतिशत बौने, 14 प्रतिशत का वजन कम

 

ट्राईसिटी एक्सप्रेस। न्यूज
बेमेतरा जिले में शून्य से 6 साल तक के बच्चों की देखभाल सही तरीके से नहीं हो रहा है। बता दें कि प्रतिवर्ष शासन इन बच्चों की देखभाल के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है, लेकिन यह पैसा जा कहां रहा है, यह अफसर ही बता देंगे। महिला एवं बाल विकास की पोषण मिशन की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। जून की इस रिपोर्ट में पता चला है कि बेमेतरा जिले के शून्य से 6 साल तक के बच्चे कमजोर हैं। इन बच्चों के देखभाल के लिए जिले में 1178 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों में रेटी-टू-ईट से लेकर अन्य पौष्टिक भोजन, अंडा-दूध, फल, खीर-पूड़ी से लेकर अन्य भोजन उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। इसके बाद भी बच्चे कमजोर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 18 प्रतिशत बच्चे बौने हो रहे हैं। 14 प्रतिशत कमजोर हैं। जिले के शून्य से 6 वर्ष तक के 73,892 बच्चों की जांच में यह खुलासा हुआ है। इतना ही नहीं शून्य से 5 साल तक के 63024 बच्चों में 9 प्रतिशत बच्चे कमजोर मिले हैं। सिर्फ एक प्रतिशत बच्चों का वजन सामान्य से अधिक मिला है। इस रिपोर्ट के बाद भी महिला एवं बाल विकास विभाग को प्रशासनिक महकमा गंभीर नहीं है। इस रिपोर्ट की लीपापोती में लगा हुआ है। ट्राईसिटी एक्सप्रेस न्यूज के रिपोर्टर ने जब ग्राउंड पर उतरकर जमीनी हकीकत का अवलोकन किया, तो स्थिति और भी चौंकाने वाली मिली। बेमेतरा जिले के ग्राम सोंड़, सिंवार और परपोड़ा में आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत बेहद खराब है। बारिश के दिनों में केंद्रों में पानी भर जा रहा है। खाने-पीने के सामान तक रखने की जगह नहीं है। इसके अलावा जो डाइट चार्ट तैयार किया गया है, उसके मुताबिक भोजन और पौष्टिक आहार बच्चों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच रहा है। खाने-पीने के अधिकांश सामान आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ता, सहायिका के घरों में रखे होते हैं। इतना ही नहीं जांच के लिए जिम्मेदार अधिकारी सुपरवाइजर से लेकर परियोजना अधिकारी को जानकारी के बाद भी कहीं कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। न ही इसे गंभीरता से लिया जाता है। जबकि इन बच्चों के देखभाल के लिए नाम पर ही सालाना एक करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च की जा रही है।
जानिए आंगनबाड़ी केंद्रों की दुर्दशा
ग्राम पंचायत सोढ में आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 1 और केंद्र क्रमांक 2के बीच की दूरी लगभग 100 फीट की होगी। इतने पास आंगनवाड़ी केंद्र कैसे बनवा दिया गया। दोनों आंगनबाड़ी केंद्र के पीछे तालाब होने की वजह से आंगनबाड़ी में बरसात के समय बच्चों को जहरील जंतुओं से खतरा है। आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र बाजार चौक, परपोड़ा, आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 02 सिंवार में बरसात की वजह से लेंटर और दीवारों में सीपेज है। पानी का निकासी की व्यवस्था नहीं है। बच्चों को दिए जाने वाला भोजन की रखने की समुचित व्यवस्था नहीं है, साथ ही सीपेज की वजह से आंगनबाड़ी केंद्रों में करंट का भी खतरा है, जहां छोटे-छोटे बच्चे आंगनबाड़ी में अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं। वहीं बरसात के मौसम का आलम यह है कि लगातार 15 दिनों से रुक-रुक कर होने वाली बारिश का नतीजा यह है कि बच्चों की उपस्थिति भी आंगनबाड़ी केंद्रों में पूरी नहीं हो रही , आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सहायिका से बात करने पर यह ज्ञात हुआ की आंगनबाड़ी केंद्रों के रखरखाव की व्यवस्था भगवान भरोसे ही है, जहां छोटे-छोटे बच्चों को सुरक्षा के साथ भोजन और उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाता है,जब की ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र ही सुरक्षित नहीं तब बच्चों की उपस्थिति कम होना कोई नई बात नहीं,पानी कीचड़,गंदगी से भरे मौहोल में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर ही उनके पालक छोटे छोटे बच्चों को नही भेज रहे। बारिश से होने वाली परेशानी और दिक्कतों का सामना करने के लिए आंगनबाड़ी , उप स्वास्थ्य केंद्र, में बरसात से पूर्व की जाने वाली मरम्मत और रखरखाव का भी तेज बारिश की वजह से बहुत बुरा हाल है। जिसकी जानकारी पूर्व में भी आंगनवाड़ी सहायिका, कार्यकर्ता, द्वारा संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंचों को दिया गया था। परंतु देखने में यह आ रहा है कि आज तक उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

 

 

योगेश कुमार तिवारी, संपादक, ट्राईसिटी एक्सप्रेस न्यूज, 9425564553, 6265741003,


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