• January 9, 2026

मनरेगा से छेड़छाड़ ग्रामीण भारत की रीढ़ पर वार — प्रदेश में चलेगा मनरेगा बचाओ संग्राम

मनरेगा से छेड़छाड़ ग्रामीण भारत की रीढ़ पर वार — प्रदेश में चलेगा मनरेगा बचाओ संग्राम

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

 

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा एक अधिकार-आधारित कानून के रूप में लागू किया गया था। इस कानून ने ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों को मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी दी, जिसके तहत 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध न होने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान किया गया। बीते डेढ़ दशक में मनरेगा ग्रामीण आजीविका सुरक्षा, पलायन रोकने और सामाजिक संरक्षण की सबसे मजबूत रीढ़ बनकर उभरा है।
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार लगातार इस कानून को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। बजट में कटौती, मजदूरी भुगतान में देरी, काम के दिनों में कमी और अब नए VB-GRAM-G अधिनियम के जरिए काम की वैधानिक गारंटी समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया गया है। साथ ही योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाकर उसके मूल दर्शन, श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज की अवधारणा पर सीधा प्रहार किया गया है।
इन्हीं कारणों से कांग्रेस पार्टी ने देशभर में “मनरेगा बचाओ संग्राम” के रूप में एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। इस अभियान के तहत केंद्र सरकार के जनविरोधी कदमों का विरोध करते हुए मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल करने की मांग की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए दुर्ग से पूर्व विधायक, र्कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण वोरा ने कहा—
“यूपीए सरकार द्वारा लाई गई फ्लैगशिप योजना मनरेगा पिछले डेढ़ दशक से ग्रामीण भारत में रोज़गार और आजीविका का सबसे मज़बूत सहारा रही है। इसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को काम की वैधानिक गारंटी दी, पलायन रोका और गांवों की अर्थव्यवस्था को सशक्त किया। लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने इस ऐतिहासिक, अधिकार-आधारित कानून के मूल दर्शन और संवैधानिक आत्मा पर सीधा प्रहार किया है। सुनियोजित तरीके से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का नाम योजना से हटाकर उनकी विरासत को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां बापू के विचारों, उनके संघर्ष और ग्राम स्वराज की अवधारणा से दूर हो जाएं। काम की गारंटी समाप्त करना और राज्यों पर बोझ डालना सीधे-सीधे मजदूरों और गांवों पर हमला है। कांग्रेस इस साजिश के खिलाफ मजबूती से खड़ी है और ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ को गांव-गांव तक ले जाएगी।”

वोरा ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत 10 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रदेशभर में चरणबद्ध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस, उपवास, पंचायत स्तर पर जनसंपर्क, शांतिपूर्ण धरने, जिला कलेक्टर कार्यालयों पर प्रदर्शन, विधानसभा घेराव और एआईसीसी की क्षेत्रीय रैलियां शामिल हैं।


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