- February 1, 2026
मोदी सरकार का बजट -जुमला पैकेज 2026, छत्तीसगढ़ फिर नजरअंदाज : अरुण वोरा

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
दुर्ग |
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण वोरा ने केंद्रीय बजट 2026 को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह बजट विकास का दस्तावेज़ कम और शब्दों व स्लोगनों की बाज़ीगरी ज़्यादा है।
“हर साल नए शब्द, नए सपने—लेकिन ज़मीन पर वही पुरानी विफलताएँ। बजट में बड़े-बड़े दावे हैं, पर आम आदमी की रोज़मर्रा की परेशानियों का कोई ठोस समाधान नहीं,” वोरा ने कहा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह बजट न युवाओं का है, न किसानों का, न मध्यम वर्ग का।
“यह शब्दों का शोर है—ऊँची दुकान, फीका पकवान। कर्तव्य की बात करने वाली सरकार ने देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाना छोड़ दिया है।”
*छत्तीसगढ़ के लिए बजट में सन्नाटा*
अरुण वोरा ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 में छत्तीसगढ़ के लिए कुछ भी ठोस नहीं है।“खनिज और बिजली से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला छत्तीसगढ़ बजट में पूरी तरह गायब है। न उद्योग, न सिंचाई, न आदिवासी क्षेत्रों के लिए कोई विशेष प्रावधान—यह राज्य के साथ सौतेला व्यवहार है।राज्य देश को देता बहुत है, लेकिन बदले में उसे हर बजट में खाली हाथ लौटाया जाता है।”
*सपनों की उड़ान, ज़मीन पर गिरती योजनाएं*
अरुण वोरा ने बजट में दोहराई गई सी-प्लेन और कनेक्टिविटी योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार की पुरानी आदत बन चुकी है कि फेल योजनाओं को नए नामों के साथ दोबारा पेश किया जाता है।
“गुजरात चुनाव में जिस सी-प्लेन परियोजना को बड़े सपने की तरह पेश किया गया था, वह बंद हो गई। अब उसी पुराने सपने को नई भाषा में परोसा जा रहा है।”
*युवाओं के भविष्य से खिलवाड़*
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना को लेकर वोरा ने गंभीर आंकड़े रखे। उन्होंने बताया कि 10,830 करोड़ रुपये की योजना रिवाइज्ड एस्टीमेट में घटकर 526 करोड़ रुपये रह गई—यानी लगभग 95% कटौती।
“युवाओं को सपने दिखाए गए, लेकिन बजट आते-आते सरकार खुद पीछे हट गई। ऑफर मिले, लेकिन बड़ी संख्या में युवाओं ने उन्हें स्वीकार नहीं किया और कई ने बीच में ही छोड़ दिया—ये आंकड़े सरकार के दावों की सच्चाई बताते हैं।”
*गांव, किसान और ‘अमृत सरोवर’—सब फाइलों में*
अरुण वोरा ने कहा कि बजट 2026 में ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और मछली पालन की बातें दोहराई गई हैं, लेकिन ज़मीनी नतीजों का कोई हिसाब नहीं।
*“अमृत सरोवर योजना 2020 में घोषित हुई थी। 2026 आ गया—तालाब सूखे हैं, किसान परेशान हैं और सरकार के पास कोई ठोस रिपोर्ट नहीं है। कागज़ों में गांव चमक रहे हैं, ज़मीन पर किसान संघर्ष कर रहा है।”
*मैन्युफैक्चरिंग: 12 साल बाद भी पिछड़ता भारत*
वोरा ने कहा कि बजट की सबसे बड़ी चूक यह है कि मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया जैसे अभियानों का नाम तक नहीं लिया. 2006–07 में GDP में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान 19% था, जो आज घटकर 14% रह गया है।“12 साल सत्ता में रहने के बावजूद भारत एशिया में मैन्युफैक्चरिंग के मामले में छठे स्थान पर है—यह प्रगति नहीं, नीतिगत विफलता है।”
अरुण वोरा ने कहा कि बजट 2026 प्रदूषण, महंगाई और कमजोर अर्थव्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर खामोश है।“दिल्ली में AQI खतरनाक स्तर पर है, यमुना प्रदूषित है। सोना-चांदी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुके हैं। बचत खातों और एफडी पर मिलने वाला ब्याज महंगाई से काफी कम है—यानी आम आदमी की कमाई हर साल घट रही है।” 2025 में भारतीय रुपया पूरे एशिया में सबसे कमजोर मुद्रा रहा।“कमजोर रुपया महंगाई बढ़ाता है, लेकिन बजट में इसे संभालने की कोई ठोस रणनीति नहीं है।”
*लबाजार का भरोसा भी डगमगाया
शेयर बाजार का ज़िक्र करते हुए वोरा ने कहा,
“कहते हैं रविवार को बाजार नुकसान नहीं देता, लेकिन बजट के बाद सेंसेक्स करीब 1000 अंक गिरा और लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की पूंजी साफ हो गई। यह निवेशकों के भरोसे पर सीधा आघात है।”
यह बजट आम जनता को राहत देने में पूरी तरह विफल रहा है। शब्द चमकते हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई बदहाल है—यही मोदी सरकार के ‘जुमला पैकेज 2026’ की असल पहचान है।




