• February 1, 2026

रिफॉर्म नहीं, रिफ्रेम्ड झूठ है यह बजट, आम जनता को ठगने का दस्तावेज : राकेश ठाकुर

रिफॉर्म नहीं, रिफ्रेम्ड झूठ है यह बजट, आम जनता को ठगने का दस्तावेज : राकेश ठाकुर

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

 

दुर्ग।
कांग्रेस, जिला दुर्ग के जिलाध्यक्ष श्री राकेश ठाकुर ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट “रिफॉर्म बजट” नहीं बल्कि जनता की पीड़ा से आंख चुराने वाला, कॉर्पोरेट हितों की रक्षा करने वाला और गरीब-विरोधी दस्तावेज है। सरकार ने इस बजट में बड़े-बड़े शब्दों और आकर्षक नारों के पीछे आम नागरिक की समस्याओं को पूरी तरह छिपाने का प्रयास किया है।
श्री ठाकुर ने कहा कि देश आज महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली और मध्यम वर्ग की टूटती कमर जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन केंद्र सरकार ने इन मुद्दों पर कोई ठोस समाधान देने के बजाय केवल आंकड़ों और घोषणाओं की बाजीगरी की है। आम जनता को राहत देने के लिए न तो आयकर में कोई वास्तविक छूट दी गई और न ही रोजमर्रा की जरूरतों की महंगाई कम करने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार AI, डिजिटल इंडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर करोड़ों रुपये के प्रावधान दिखा रही है, लेकिन यह पूरी तरह रोजगारविहीन विकास मॉडल है। युवाओं के लिए न तो स्थायी नौकरियों की व्यवस्था की गई और न ही बंद पड़ी सरकारी भर्तियों को शुरू करने की कोई मंशा दिखाई दी। आज देश का युवा डिग्री लेकर सड़कों पर भटक रहा है और सरकार केवल भविष्य के सपनों की बातें कर रही है।
राकेश ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़, ओडिशा और केरल में माइनिंग कॉरिडोर की घोषणा यह साबित करती है कि भाजपा सरकार का असली एजेंडा प्राकृतिक संसाधनों को कॉर्पोरेट कंपनियों के हवाले करना है। इससे आदिवासी क्षेत्रों में विस्थापन बढ़ेगा, पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचेगी और स्थानीय लोगों के अधिकारों का हनन होगा। कांग्रेस इस लूट के खिलाफ मजबूती से खड़ी है।
उन्होंने आगे कहा कि किसानों के लिए इस बजट में कुछ भी ठोस नहीं है। MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, डीजल-खाद की कीमतों में राहत जैसे मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। यह वही सरकार है जो चुनाव के समय किसानों से बड़े-बड़े वादे करती है और सत्ता में आते ही उन्हें भूल जाती है।
श्री ठाकुर ने कहा कि मध्यम वर्ग, छोटे व्यापारी, MSME सेक्टर और मजदूर वर्ग के लिए भी यह बजट निराशाजनक है। GST की जटिलताओं, बढ़ती लागत और घटती मांग से जूझ रहे छोटे व्यवसायों को कोई वास्तविक राहत नहीं दी गई, जिससे आने वाले समय में आर्थिक संकट और गहराएगा।


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