- February 5, 2026
पहले जंबूरी और अब राहुल गांधी के साथ बृजमोहन अग्रवाल की तस्वीर, याद दिला रही 2001 में उनके निलंबन की, देखिए पूरी खबर…

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
भाजपा के कद्दावर नेता और रायपुर से सांसद बृजमोहन अग्रवाल एक बार फिर चर्चा में हैं। 3 फरवरी को दिल्ली में संसद के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और दिग्विजय सिंह के साथ उनकी चर्चा की तस्वीर सामने आई है। इसे लेकर बवाल मचा हुआ है। वजह यह है कि पिछले दिनों बालोद में हुई राष्ट्रीय जंबूरी में उन्हें किनारा कर दिया गया था। बृजमोहन अग्रवाल ने इस आयोजन में करोड़ों के घोटाले का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं स्काउट गाइड के राज्य अध्यक्ष को लेकर भी उन्होंने कोर्ट में चैलेंज किया था। इन सबसे भाजपा की भी किरकिरी हुई। बाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जैन ने स्पष्ट किया कि विभागीय मंत्री ही पदेन अध्यक्ष होगा। इसके बाद से बृजमोहन नाराज चल रहे हैं, ऐसे समय में राहुल गांधी के साथ उनकी तस्वीर कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिसे लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत में खूब बवाल कट रहा है !
इसे समझने से पहले थोड़ा फ्लैशबैक में जाना होगा। बात 2001 की है। 2001 में जब एकात्म परिसर में हुई आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में बृजमोहन अग्रवाल जी को 17 महीने के लिए पार्टी से सस्पेंड किया गया था!
ये वो दौर था जब प्रदेश में अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे।
तब तरुण चटर्जी जैसे दिग्गज भाजपा से पलटी मारकर मंत्री गए !
ये वो दौर था तब सस्पेंड विधायक बृजमोहन अग्रवाल को भी खूब लॉलीपॉप दिखाया गया। निलंबन के अपमान के बावजूद उन्होंने भाजपा का दामन नहीं छोड़ा। उस समय ताराचंद साहू भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे।
पार्टी के कई दिग्गज बृजमोहन अग्रवाल को परमानेंट बर्खास्त करवाने के लिए तीन नेता खूब तिकड़म लगा रहे थे। लेकिन धैर्य के साथ बृजमोहन वो कठिन 17 महीने भी निकल गए।
निलंबन के 23 साल बाद बृजमोहन अग्रवाल को 2024 में जिन हालातो में मंत्रिमंडल से अलग करवाया गया। तब और अब वाले बृजमोहन अग्रवाल में कहीं ज्यादा परिवर्तन आ चुका है! सरकार के विरुद्ध उनका हर प्रहार वाला लेटर मुख्यमंत्री के साथ सीधे मीडिया तक पहुंचने लगा है।
जम्बूरी के मुद्दे पर उनकी फ्रंट फुट वाली आक्रामक बैटिंग से रणनीतिकार अचंभित नहीं है, लेकिन परेशान जरूर है। 3 फरवरी को दिल्ली में संसद के बाहर आरएसएस की पृष्ठभूमि से जुड़े राज्यसभा के पूर्व सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे और दिग्विजय सिंह आत्मीय मुलाकात कर रहे थे। उस समय बृजमोहन अग्रवाल भी मौजूद थे। तभी अचानक राहुल और प्रियंका गांधी वाड्रा भी वहां आ गए। अब चुंकि मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब राजनीतिक खींचतान चल रही है। इसलिए मंत्री से सांसद बने बृजमोहन अग्रवाल को भी सफाई देनी पड़ रही है! मुलाकात की टाइमिंग और माहौल को देखकर समझने वाले अपने हिसाब से इस तस्वीर के मायने निकाल रहे हैं। वैसे भी बृजमोहन अग्रवाल को प्रदेश भाजपा में अब वो तरजीहद नहीं मिल रही है, जिसकी अपेक्षा की जाती है। बृजमोहन वो चेहरा है जिन्होंने पार्टी के लिए कई बार ऐसे ऐसे काम किए हैं, जो सामान्य के बस की नहीं है। हरे हुए प्रत्याशियों को जीत दिलाई है। उनका चुनावी संचालन कभी फेल नहीं हुआ। पूरे प्रदेश में उनके समर्थकों की एक लंबी लिस्ट है। राजनीति बिसात के वे माहिर खिलाड़ी के रूप में पहचाने जाते हैं। वो इस बात को भी समझ रहे हैं कि आखिर क्यों इस समान्य सी हुई मुलाकात को लेकर बवाल मचाया जा रहा है।




