• March 9, 2026

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर भूनेश्वरी चतुर्वेदी बनीं आत्मनिर्भर, आज बढ़ा रहीं परिवार की आय

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर भूनेश्वरी चतुर्वेदी बनीं आत्मनिर्भर, आज बढ़ा रहीं परिवार की आय

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

 

 

बेमेतरा । जिला बेमेतरा के जनपद पंचायत बेरला अंतर्गत ग्राम साकरा की रहने वाली भूनेश्वरी चतुर्वेदी आज “लखपति दीदी” के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं। महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन की दिशा में स्वयं सहायता समूहों की पहल ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। भूनेश्वरी चतुर्वेदी महिला विकास स्वयं सहायता समूह, ग्राम साकरा से जुड़ी हुई हैं और आज अपने परिश्रम और संकल्प के बल पर आत्मनिर्भर बनकर अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।
भूनेश्वरी चतुर्वेदी बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। परिवार के भरण-पोषण के लिए वे कृषि कार्य और मजदूरी पर निर्भर रहती थीं। इसके साथ ही उन्होंने गांव में एक छोटा सा फैंसी स्टोर भी शुरू किया था, लेकिन सीमित संसाधनों और पूंजी की कमी के कारण व्यवसाय को आगे बढ़ाना आसान नहीं था। इससे होने वाली आय से परिवार का गुजारा तो हो जाता था, लेकिन आर्थिक प्रगति की संभावनाएँ सीमित थीं।

उन्होंने 31 सितंबर 2020 को महिला विकास स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन में एक नई शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें समूह के माध्यम से सीआईएफ (कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड) और बैंक ऋण की सुविधा मिली। इस आर्थिक सहयोग ने उनके सपनों को नया आधार दिया। उन्होंने समूह से प्राप्त ऋण की राशि से अपने फैंसी स्टोर की दुकान का विस्तार किया और दुकान में फोटो कॉपी मशीन, साड़ियों का व्यवसाय तथा सिलाई मशीन की व्यवस्था की। इसके साथ ही उन्होंने सिलाई का कार्य भी प्रारंभ किया, जिससे उनकी आय के नए स्रोत बन गए। आज उनकी दुकान गांव में एक छोटे स्वरोजगार केंद्र के रूप में विकसित हो चुकी है। गांव के लोग यहां फोटो कॉपी, साड़ी खरीदने और सिलाई से जुड़े कार्यों के लिए आते हैं। इन गतिविधियों से उन्हें हर महीने अच्छी आमदनी होने लगी है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। वे न केवल अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और घर के अन्य खर्चों को भी सहजता से संभाल रही हैं।
भूनेश्वरी चतुर्वेदी बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आत्मविश्वास, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी मिला। समूह की बैठकों और गतिविधियों ने उन्हें व्यवसाय प्रबंधन, बचत और आय बढ़ाने के तरीके सिखाए। आज वे आत्मनिर्भर बनकर गांव की अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। भूनेश्वरी चतुर्वेदी की यह सफलता कहानी इस बात का उदाहरण है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग मिले तो वे अपने जीवन की दिशा बदल सकती हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं और वे आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर रही हैं।

 

ट्राई सिटी एक्सप्रेस, ब्यूरो चीफ बेमेतरा, योगेश कुमारतिवारी, 9425564553,6265741003,


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