- March 31, 2026
ईओडब्लू का बड़ा खुलासा, भाटिया और वेलकम डिस्टलरी से अवैध शराब की सप्लाई, 4 साल बाद जब्त किए गए 16 ट्रक

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने अवैध शराब की सप्लाई करने वाली दो डिस्टलरियों की 16 गाड़ियों को सोमवार को जब्त किया है। ये गाड़ियां भाटिया और वेलकम डिस्टलरी से अवैध शराब लेकर निकलती थीं और दुकानों तक पहुंचाती थीं। एजेंसी की कार्रवाई के बाद इन गाड़ियों को छिपा दिया गया था, जिन्हें चार साल बाद जब्त किया गया।
ईओडब्ल्यू ने बताया कि बिलासपुर के कोटा में वेलकम डिस्टलरी और मुंगेली के सरगांव में भाटिया वाइंस डिस्टलरी स्थित है, जहां शराब सप्लाई में भारी गड़बड़ी की गई। शासन से बिना अनुमति शराब का उत्पादन किया जाता था और फिर उसे अवैध तरीके से सप्लाई किया जाता था। इस पर सरकार को कोई सर्विस और ड्यूटी चार्ज जमा नहीं किया गया। इसमें वेलकम डिस्टलरी की 8 और भाटिया वाइंस डिस्टलरी की 8 गाड़ियां शामिल हैं। एजेंसी इन गाड़ियों के मालिकों की जानकारी जुटा रही है।
भाटिया, वेलकम और छत्तीसगढ़ डिस्टलरी से तीन साल में 2200 करोड़ की अवैध शराब की सप्लाई
राज्य में हुए आबकारी घोटाले की जांच ईडी और ईओडब्ल्यू कर रही है। दोनों ही एजेंसियों ने अब तक राज्य के किसी भी डिस्टलरी मालिक की गिरफ्तारी नहीं की है, जबकि दोनों की चार्जशीट में डिस्टलरियों से 2200 करोड़ रुपये की अवैध शराब सप्लाई की पुष्टि हुई है। तीनों डिस्टलरी के मालिक सिंडिकेट का हिस्सा रहे हैं और उन्हें तीन साल में करोड़ों रुपये का कमीशन भी मिला है। वहीं, झारखंड एसीबी ने वेलकम डिस्टलरी के मालिक राजेंद्र जायसवाल उर्फ छुन्नी और छत्तीसगढ़ डिस्टलरी के मालिक नवीन केडिया को गिरफ्तार किया है। भाटिया वाइंस डिस्टलरी के मालिक भूपेंद्र सिंह भाटिया की तलाश जारी है। इन डिस्टलरियों में कई डायरेक्टर भी हैं, जिन्हें कार्रवाई से बचाया गया है।
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों का दावा है कि इस मामले में डिस्टलरी मालिकों की भूमिका की अलग से जांच चल रही है। इसी कड़ी में अवैध शराब की ट्रांसपोर्टिंग करने वाली 16 गाड़ियों को जब्त किया गया है। इसमें सभी डायरेक्टर की भूमिका की जांच की जा रही है। आने वाले समय में इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अवैध शराब की ट्रांसपोर्टिंग के लिए अतिरिक्त उत्पादन
सिंडिकेट के निर्देश पर तीनों डिस्टलरियों से पिछली सरकार के दौरान भारी मात्रा में अवैध शराब की बिक्री की गई। सरकार से मिले ऑर्डर के अलावा अतिरिक्त मात्रा में शराब का उत्पादन किया गया और उसकी बॉटलिंग की गई, लेकिन इसे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। अवैध शराब के ट्रांसपोर्ट के लिए 16 नई गाड़ियां खरीदी गईं। इन गाड़ियों में शराब लोड कर फैक्ट्री के पीछे से आधी रात को निकाला जाता था। ये गाड़ियां गोदाम नहीं जाती थीं, बल्कि सीधे सरकारी शराब दुकानों तक पहुंचती थीं, जहां शराब को अनलोड कर बेचा जाता था। अवैध शराब की बिक्री के लिए अलग से गल्ला रखा गया था, जिसमें पैसे अलग रखे जाते थे। यह पैसा सीधे सिंडिकेट के पास जाता था। इसके लिए तीनों डिस्टलरियों को मोटा कमीशन दिया जाता था। एजेंसी का दावा है कि 2200 करोड़ रुपये की अवैध सप्लाई हुई है।
कर्मचारियों के नाम पर खरीदे गए वाहन
तीनों डिस्टलरियों में अवैध शराब की ट्रांसपोर्टिंग के लिए नई गाड़ियां खरीदी गईं। ये गाड़ियां फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों और उनके करीबी लोगों के नाम पर खरीदी गई थीं। 15 हजार रुपये वेतन पर बॉटलिंग का काम करने वाले कर्मचारी के नाम पर 10 चक्का ट्रक खरीदा गया। सुरक्षा गार्ड से लेकर अन्य करीबी लोगों के नाम पर भी गाड़ियां खरीदी गईं।
ऐसे चल रहा था सिस्टम
पिछले 3 साल में 60.05 लाख पेटियां अवैध शराब की सप्लाई की गई। इससे सिंडिकेट को 2200 करोड़ रुपये का कमीशन मिला।
इसमें प्रति पेटी कमीशन नीचे से ऊपर तक बांटा जाता था। इसमें 600 रुपये प्रति पेटी डिस्टलरी को कमीशन मिलता था। इसमें अनवर और अनिल को 300 रुपये कमीशन मिलता था। इसमें 150 रुपये कमीशन आबकारी अधिकारियों को मिलता था। विकास और अरविंद को 100 रुपये कमीशन मिलता था। 2540 रुपये सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और राजनेताओं को जाता था।




