• March 31, 2026

बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को लेकर अधिकारियों को दी गई विस्तृत जानकारी

बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को लेकर अधिकारियों को दी गई विस्तृत जानकारी

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

 

 

बेमेतरा । कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देशन में तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री चन्द्रबेश सिंह सिसोदिया एवं जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री सी.पी. शर्मा के मार्गदर्शन में जिले के समस्त बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों तथा अंतर्विभागीय जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारियों के लिए जिला स्तरीय जागरूकता प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ के संकल्प को प्रभावी रूप से लागू करना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को बाल विवाह की रोकथाम से संबंधित विभिन्न कानूनी, सामाजिक एवं प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए विभागों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है तथा ग्राम स्तर तक निगरानी तंत्र को मजबूत करना होगा।

*कानूनी प्रावधानों की दी गई जानकारी*
प्रशिक्षण में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 (PCMA 2006) के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई। बताया गया कि लड़कियों के लिए 18 वर्ष तथा लड़कों के लिए 21 वर्ष से कम आयु में विवाह करना पूर्णतः अवैध है। यदि दोनों में से किसी एक की आयु निर्धारित सीमा से कम है तो वह बाल विवाह की श्रेणी में आता है और यह कानूनन दंडनीय अपराध है।

*अपराध की गंभीरता पर विशेष जोर*
अधिकारियों को बताया गया कि बाल विवाह करना, करवाना या उसमें किसी भी प्रकार से सहयोग करना अपराध की श्रेणी में आता है। विवाह का कार्ड छापना, टेंट लगाना, भोजन बनाना या किसी भी प्रकार की सेवा देना भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है। प्रशिक्षण में सभी अधिकारियों को इस विषय में सतर्कता बरतने और समय रहते कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

*बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की भूमिका*
प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत, सेक्टर और ब्लॉक स्तर पर नियुक्त बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों (CMPO) के कार्य, अधिकार तथा उनकी जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही बाल विवाह की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया भी समझाई गई।

*रोकथाम के लिए मजबूत किया जाएगा निगरानी तंत्र*
प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय स्तर पर ‘बाल विवाह मुक्त’ निगरानी समितियों के गठन पर विशेष चर्चा की गई। अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर विशेष सतर्कता रखने और सूचना तंत्र को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि बाल विवाह की घटनाओं को पहले ही रोका जा सके।

*बाल विवाह के दुष्परिणामों से कराया गया अवगत*
प्रतिभागियों को बताया गया कि बाल विवाह से बालिकाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, शिक्षा बाधित होती है तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में वृद्धि की संभावना रहती है। इसके साथ ही बच्चों के अधिकारों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

*चाइल्ड हेल्पलाइन का उपयोग करने की अपील*
प्रशिक्षण में अधिकारियों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी देते हुए बताया गया कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1098 पर जानकारी दी जा सकती है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों से अपील की गई कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर बाल विवाह को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं और ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ के संकल्प को सफल बनाने में सहयोग करें।

 

 

ट्राई सिटी एक्सप्रेस, ब्यूरो चीफ बेमेतरा, योगेश कुमारतिवारी, 9425564553,6265741003,


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