- April 22, 2026
कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमान जनक शब्दों के लिए देश की जनता के सामने सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए- सुरेंद्र कौशिक

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक ने जारी किए गए अपने बयान में कहा कि विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, जिनके नेतृत्व में कश्मीर से आतंकवाद खत्म होने के कगार पर है, साथ ही देश से नक्सलवाद समाप्त हुआ है। जिन्होंने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर उसे देश का अभिन्न अंग बनाया और वहाँ शांति एवं विकास का नया दौर शुरू हुआ, ऐसे प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना देश की गरिमा पर सीधा आघात है।
श्री कौशिक ने कहा कि परिवारवाद, घमंड और तुष्टीकरण की सोच से ग्रस्त कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी को “आतंकवादी” कहकर 140 करोड़ देशवासियों के साथ देश के सर्वोच्च पद की गरिमा को भी ठेस पहुँचाई। यह आलोचना नहीं, बल्कि ऐसी भाषा है जो सीधे-सीधे राजनीतिक दिवालियापन को दर्शाती है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिया गया यह बयान कांग्रेस की गिरती हुई राजनीतिक सोच और उसकी हताशा को उजागर करता है। जब-जब कांग्रेस तथ्यों, विकास और जनहित के मुद्दों पर जवाब देने में विफल होती है, तब-तब वह इस तरह की निम्नस्तरीय भाषा का सहारा लेकर अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश करती है। यह न तो स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है और न ही जिम्मेदार विपक्ष की।
जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक ने आगे कहा ऐसे ओछी सोच और शब्द न केवल प्रधानमंत्री पद की गरिमा का अपमान करते हैं, बल्कि उन करोड़ों देशवासियों के विश्वास और जनादेश का भी अनादर करते हैं, जिन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपना नेतृत्व चुना है।कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को समझना चाहिए कि देश की जनता अब इस तरह की भाषा और राजनीति को स्वीकार करने वाली नहीं है। बार-बार मर्यादा का उल्लंघन करना और फिर उसे राजनीतिक बयानबाजी बताकर टाल देना, यह अब नहीं चलेगा।
श्री कौशिक ने आगे कहा कि इस अत्यंत आपत्तिजनक और निंदनीय बयान के लिए कांग्रेस और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष को देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा और राष्ट्र के सर्वोच्च पद का सम्मान हर हाल में बनाए रखना आवश्यक है।




