- June 24, 2026
बीएसपी में स्क्रैप चोरों को राजनीतिक संरक्षण, पूरे सिंडिकेट की हो जांच, एचटीसी के संचालक से भी हो पूछताछ : आरपी शर्मा

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में सामने आए स्क्रैप चोरी मामले को लेकर आचार्य नरेंद्र देव जन अधिकार अभियान समिति के अध्यक्ष आरपी शर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस मामले में केवल स्क्रैप माफियाओं ही नहीं, बल्कि बीएसपी प्रबंधन और सीआईएसएफ के कुछ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
आरपी शर्मा ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र में लंबे समय से स्क्रैप माफियाओं का जाल फैला हुआ है। उनका आरोप है कि वर्ष 2017 से कुछ प्रभावशाली ठेकेदारों द्वारा संयंत्र में समानांतर व्यवस्था चलाकर मनमानी की जा रही थी और परिवहन सहित कई कार्य उनके इशारों पर संचालित होते थे। उन्होंने बताया कि इस कथित लूट और अनियमितताओं को लेकर वे लगातार प्रधानमंत्री कार्यालय, इस्पात मंत्रालय, सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों को शिकायतें भेजते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में उन्होंने तत्कालीन डायरेक्टर इंचार्ज अनिर्बान दासगुप्ता तथा ईडी वर्क्स अंजनी कुमार सहित अन्य अधिकारियों के संबंध में भी जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर आगाह किया था। शर्मा का आरोप है कि विभिन्न यूनिटों में आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं।
आरपी शर्मा ने बताया कि उनकी शिकायतों के जवाब में उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय, इस्पात सचिव तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय से पत्र भी प्राप्त हुए थे। उनका कहना है कि वे लंबे समय से राष्ट्र की संपत्ति के दुरुपयोग और लूट की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2012 में स्क्रैप माफिया लखोटिया के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें धमकियां मिली थीं तथा भिलाई इस्पात संयंत्र की ओर से उनके खिलाफ एक करोड़ रुपये का मानहानि दावा भी किया गया था। साथ ही लोकनायक जयप्रकाश नारायण प्रतिष्ठान की लीज़ संबंधित मान्यता भी समाप्त कर दी गई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट के आदेश से बहाल किया गया।
हाल ही में सामने आए करीब 250 टन स्क्रैप चोरी के मामले का उल्लेख करते हुए शर्मा ने कहा कि इस प्रकरण में सीआईएसएफ और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई सराहनीय है। हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संयंत्र में लगातार चोरी की घटनाएं हो रही थीं तो सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई। उन्होंने पिछले वर्ष सितंबर माह में हुए लोहा चोरी के मामले का भी जिक्र किया, जिसमें ट्रक, चालक और सुपरवाइजर पकड़े गए थे। शर्मा का कहना है कि उस समय भी कई सवाल उठे थे। तब एचटीसी के डायरेक्टर इंद्रजीत ने कहा था कि मामला कुछ और, तब प्रबंधन पर दबाव बनाने के लिए ट्रकों की हड़ताल भी की गई। इनके द्वारा 17-18 ठेकेदारों को प्लांट के अंदर जाने से रोका गया और धमकी भी गई थी. इसी दौरान बीएसपी के पूर्व कर्मी के बेटे के साथ मारपीट और उसे जान से मारने की धमकी की बात भी सामने आई थी जिसका मामला अदालत में चल रहा है. वर्तमान स्क्रैप चोरी का मामला भी कहीं न कहीं उसी नेटवर्क से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। अगर मामला इससे जुड़ा है तो क्या एचटीसी के संचालक से भी पूछताछ नहीं होनी चाहिए। क्या उनके कारोबार के साथ-साथ उनकी संपत्ति के भी जांच नहीं होनी चाहिए?
प्रिंट मीडिया में कुछ दिनों से स्क्रैप चोरी मामले को लेकर जिस तरह से खबर छप रही है वह इसके लिए बधाई के पात्र हैं। राष्ट्रीय संपत्ति को बचाने के लिए जो जागरूकता दिखाई गई है उसके बाद पुलिस पर भी यह दबाव है कि स्क्रैप चोरी की तह तक जाए और पूरे सिंडिकेट को उजागर करें। आउटसोर्सिंग के माध्यम से भिलाई स्टील प्लांट में जो लोक की जा रही है इसके भी जांच होनी चाहिए।
आरपी शर्मा ने मांग की कि स्क्रैप चोरी मामले की जांच केवल निचले स्तर तक सीमित न रहकर पूरे सिंडिकेट तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संबंधित ठेकेदारों, कारोबारियों, उनकी संपत्तियों तथा चुने हुए जन प्रतिनिधियों की इसमें क्या भूमिका है उसकी भी जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस मामले से संबंधित दस्तावेज और शिकायतें प्रधानमंत्री कार्यालय, सीबीआई तथा अन्य जांच एजेंसियों को भेजी जाएंगी। उनका मानना है कि राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा के लिए स्क्रैप माफियाओं, बीएसपी के संबंधित अधिकारियों तथा सीआईएसएफ के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष और व्यापक जांच आवश्यक है।
मामले के शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, इस्पात मंत्रालय, प्रवर्तन निदेशालय सहित अन्य जांच एजेंसियों से की जा रही है।




