- July 10, 2026
महादेव सट्टा एप सीबीआई ने पहली बार पेश की एक साथ 6 चार्जशीट, सरगना समेत 72 आरोपी घेरे में, इधर प्रोटेक्शन मनी लेने का जिन अफसरों और राजनेताओं पर आरोप लगे, उनसे सिर्फ पूछताछ, कार्रवाई कोई नहीं

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
देश के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा घोटाला मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने छह नए आरोप पत्र (चार्जशीट) कोर्ट में पेश किए हैं। इनमें एक चार्जशीट महादेव ऐप से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में और पांच चार्जशीट अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े मामलों में दायर की गई हैं। चार्जशीट में जिन छह प्रमुख आरोपियों का उल्लेख किया गया है, उनमें असीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धम्मानी तथा भोपाल के विशाल आहूजा और धीरज आहूजा के नाम शामिल हैं।
विशाल और धीरज दोनों ट्रैवल एजेंसी के संचालक हैं। दोनों पर आरोप है कि महादेव ऐप के प्रमोटरों, उनके परिवार, व्यावसायिक सहयोगियों और उनसे जुड़ी मशहूर हस्तियों की टिकटिंग का पूरा संचालन इनके जिम्मे था। आहूजा बंधुओं ने बड़ी चालाकी से मुख्य टिकट प्रदाताओं के पास वॉलेट बैलेंस जमा कराया और उसी बैलेंस का इस्तेमाल घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय टिकटों की बुकिंग के लिए किया गया। चार्जशीट में यह भी खुलासा किया गया है कि आरोपी सट्टा चलाने के लिए अफसरों को प्रोटेक्शन मनी भी देते थे। साथ ही फर्जी खातों से रकम विदेश भेजते थे। इन आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अलावा भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई ने इन आरोप पत्रों के साथ महादेव ऐप के मुख्य सरगनाओं सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ भी अतिरिक्त साक्ष्य कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। दोनों को पहले ही इस मामले में आरोपी बनाया जा चुका है।
66 अन्य लोगों के खिलाफ पांच चार्जशीट
जांच के समानांतर हिस्से में एजेंसी ने 66 अन्य लोगों के खिलाफ पांच और आरोप पत्र दाखिल किए हैं। इनमें चंद्राकर और उप्पल के अलावा कथित “सट्टेबाजी सिंडिकेट पैनल” के कई प्रमुख सदस्य शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इन लोगों ने अवैध सट्टेबाजी से अर्जित अपराध की कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को ठिकाने लगाने और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) में अहम भूमिका निभाई। इन पांचों आरोप पत्रों को भारतीय दंड संहिता तथा छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत अदालत में पेश किया गया है।
डिजिटल विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को जोड़ा
सीबीआई की जांच के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क भारत में अब तक सामने आए सबसे बड़े अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट में शामिल है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के आक्रामक इस्तेमाल के जरिए इस नेटवर्क का विस्तार देशभर में किया गया और लाखों लोगों को इससे जोड़ा गया। जांच में सामने आया है कि सिंडिकेट ने विभिन्न राज्यों में अवैध सट्टेबाजी पैनल स्थापित किए, डिजिटल विज्ञापनों के माध्यम से नए यूजर जोड़े और बड़े पैमाने पर सट्टेबाजी का कारोबार संचालित किया।
आरोपियों को भारत लाने का किया जा रहा प्रयास
सीबीआई के अनुसार, महादेव ऐप के प्रमोटर और उनके कई प्रमुख सहयोगी कुछ वर्ष पहले भारत छोड़कर पश्चिम एशियाई देशों में चले गए थे और वहीं से इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं। इन आरोपियों को भारत लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद ली जा रही है। विदेश में मौजूद चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल पहले ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर चुका है। साथ ही, भारतीय कानून के तहत उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, ताकि देश में मौजूद उनकी संपत्तियां जब्त की जा सकें।
डेढ़ साल चली जांच लेकिन अफसरों के नाम ही नहीं
महादेव सट्टा एप मामले में ईडी और ईओडब्ल्यू की जांच में कई बड़े राजनेताओं के साथ राज्य के बड़े अधिकारियों का नाम सामने आया। यही कारण है कि मामले की पूरी जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने 18 दिसंबर 2024 को ईडी और ईओडब्ल्यू की एफआईआर के आधार पर महादेव सट्टा मामले में 21 लोगों के खिलाफ 13 गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। करीब डेढ़ साल की जांच के बाद सीबीआई ने चार्जशीट तो पेश की, लेकिन उन्हीं लोगों को आरोपी बनाया, जिन्हें ईडी और अन्य एजेंसियां पूर्व में आरोपी बना चुकी है। यही नहीं पूर्व में सीबीआई ने राज्य के कुछ पुलिस अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें आईजी, डीआईजी, एसपी, एएसपी से लेकर टीआई रैंक तक के अधिकारी शामिल थे। छापे के बाद इन अधिकारियों को बयान के लिए पुलिस लाइन स्थित ऑफिसर मेस में बनाए गए सीबीआई के अस्थायी कैंप में बुलाया गया था। साथ ही कुछ अधिकारियों को दिल्ली बुलाकर भी बयान लिया गया था। बावजूद इसके अब भी अधिकारियों का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं किया गया है। इसके चलते सीबीआई के जांच पर सवाल खड़े हो रहे हैं।




