- July 19, 2026
बीआईटी दुर्ग एवं श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय के बीच हुआ शैक्षणिक सहयोग समझौता

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
दुर्ग। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन तथा विद्यार्थियों को उद्योगोन्मुखी अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), दुर्ग एवं स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, हुदको, भिलाई के मध्य एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस एमओयू पर बीआईटी, दुर्ग के प्राचार्य डॉ. अनुप मिश्रा तथा स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, भिलाई की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने हस्ताक्षर किए।
समझौते के माध्यम से दोनों संस्थान शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं कौशल विकास के क्षेत्र में मिलकर कार्य करेंगे। इसके अंतर्गत संयुक्त शोध परियोजनाएं, शोध पत्रों का प्रकाशन, फैकल्टी एक्सचेंज, अतिथि व्याख्यान, संकाय विकास कार्यक्रम (FDP), तकनीकी कार्यशालाएं तथा पाठ्यक्रम विकास जैसी गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, हैकाथॉन, समर स्कूल, तकनीकी प्रशिक्षण, स्टार्टअप एवं उद्यमिता गतिविधियों, नवाचार कार्यक्रमों तथा बीआईटी दुर्ग की आधुनिक प्रयोगशालाओं एवं अनुसंधान सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। इससे विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक ज्ञान और रोजगार की संभावनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
दोनों संस्थानों के अनुसार यह सहयोग शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ अनुसंधान संस्कृति को सुदृढ़ करेगा तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को नए अवसर उपलब्ध कराएगा। यह समझौता तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर आपसी सहमति से इसका विस्तार भी किया जा सकेगा।
इस अवसर पर इंडस्ट्री–इंस्टीट्यूट पार्टनरशिप सेल (IIPC) के समन्वयक डॉ. डी. पी. मिश्रा सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को क्षेत्र में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार और संस्थागत सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. अनुप मिश्रा ने कहा कि यह साझेदारी विद्यार्थियों के समग्र विकास, अनुसंधान एवं उद्योग-अकादमिक सहयोग को नई गति प्रदान करेगी। वहीं डॉ. हंसा शुक्ला ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों संस्थानों का यह सहयोग विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए ज्ञान, कौशल एवं अनुसंधान के नए अवसर सृजित करेगा।




