- August 18, 2026
जिला न्यायालय दुर्ग में POSH Act एवं श्रम कानूनों पर जागरूकता कार्यशाला: सुरक्षित कार्यस्थल की दिशा में साझा ज़िम्मेदारी का संदेश

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
एक सुरक्षित कार्यस्थल केवल नियमों से नहीं बनता वह तब बनता है, जब हर व्यक्ति अपनी भूमिका को समझे और गरिमा, सम्मान तथा समानता को रोज़मर्रा के व्यवहार का हिस्सा बनाए। इसी सोच के साथ जिला न्यायालय दुर्ग के नवीन सभागार में ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act) तथा महिलाओं के अधिकार एवं श्रम कानून’ विषय पर विशेष जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश था – Safe Workplace is Everyone’s Responsibility. उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर थे। उनके अतिरिक्त कुटुंब न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश श्रीमती सुमन एक्का, विशाखा समिति की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता टोप्पो, सदस्यगण, समस्त न्यायिक अधिकारीगण, अधिवक्ता संघ दुर्ग के सदस्य अधिवक्तागण एवं अन्य अधिवक्तागण तथा श्रम विभाग की लेबर इंस्पेक्टर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस कार्यशाला की सबसे महत्वपूर्ण बात थी इसका समावेशी दृष्टिकोण। POSH Act को केवल महिलाओं से जुड़ा विषय मानने के बजाय, इस बार न्यायालय के पुरुष अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी सक्रिय रूप से सहभागी बनाया गया। महिला कर्मचारियों के लिए आयोजित प्रथम चरण के बाद यह विशेष सत्र इस विचार पर केंद्रित रहा कि लैंगिक समानता और सुरक्षित कार्यस्थल केवल एक वर्ग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे संस्थान की साझा ज़िम्मेदारी है।
तकनीकी सत्रों में षष्टम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती श्यामवती मरावी ने POSH Act, 2013 के प्रमुख प्रावधानों, आंतरिक शिकायत समिति के गठन तथा शिकायतों की निष्पक्ष और संवेदनशील जांच की प्रक्रिया पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया।
दूसरे सत्र में स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा लकड़ा ने भारतीय श्रम कानूनों के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करते हुए मातृत्व लाभ, कार्य के घंटे, समान अवसर तथा महिलाओं के कार्यस्थल संबंधी अधिकारों की जानकारी दी।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर ने कार्यस्थल पर गरिमा, परस्पर सम्मान और संवेदनशील व्यवहार को संस्थागत संस्कृति का अनिवार्य हिस्सा बताया तथा सभी से इसे व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का समापन चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (FTSC POCSO) श्री अनीश दुबे के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
कार्यशाला का सार यही रहा कि POSH Act केवल शिकायत की स्थिति में लागू होने वाला कानून नहीं, बल्कि सम्मान, संवेदनशीलता और accountability की workplace culture विकसित करने का माध्यम है। इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए प्रतिभागियों को यह संदेश दिया गया कि हर कर्मचारी—चाहे वह किसी भी पद पर हो—एक सुरक्षित कार्यस्थल के निर्माण में योगदान देता है।




