- September 8, 2026
भाजपा की आरक्षण विरोधी और दलित-आदिवासी विरोधी मंशा हुई उजागर: भिलाई इस्पात संयंत्र में एस सी एस टी बच्चों से ट्यूशन फीस वसूली केंद्र सरकार की गहरी साज़िश

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
भिलाई। केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार की कथनी और करनी का अंतर अब पूरी तरह उजागर हो चुका है। सार्वजनिक उपक्रमों के ज़रिए दलितों और आदिवासियों के अधिकारों पर लगातार कुठाराघात किया जा रहा है। केंद्र सरकार के उपक्रम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के अंतर्गत आने वाले भिलाई इस्पात संयंत्र (बी एस पी) के शिक्षा विभाग द्वारा इस माह से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्कूली बच्चों से ट्यूशन फीस की वसूली शुरू कर दी गई है।
भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना काल से लेकर आज तक कभी भी एस सी-एसटी वर्ग के बच्चों से ट्यूशन फीस नहीं ली गई थी। संयंत्र के इतिहास में पहली बार यह अन्यायपूर्ण कटौती सीधे कर्मचारियों के वेतन से की जा रही है। स्थानीय प्रबंधन केंद्र सरकार के इशारे के बिना इतना बड़ा कदम कभी नहीं उठा सकता। यह फैसला स्पष्ट करता है कि भाजपा नीत मोदी सरकार अब सार्वजनिक उपक्रमों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से आरक्षण और सामाजिक न्याय के ढांचे को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े शीर्ष पदाधिकारियों द्वारा समय-समय पर सार्वजनिक रूप से आरक्षण की समीक्षा या इसे बंद करने की मंशा जाहिर की जाती रही है। भले ही भारी राजनीतिक विरोध के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद और चुनावी मंचों से दावा किया था कि मोदी सरकार आरक्षण कभी खत्म नहीं करेगी, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। एक तरफ़ अंधाधुंध निजीकरण के ज़रिए सार्वजनिक उपक्रमों को बेचकर आरक्षण के अवसर छीने जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बचे हुए उपक्रमों में एस सी एस टी वर्ग को दशकों से मिलने वाली रियायतों और अधिकारों पर डाका डाला जा रहा है।
भिलाई इस्पात संयंत्र में एस सी एस टी बच्चों से ली जा रही यह फीस इसी आरक्षण विरोधी मानसिकता की शुरुआत है। यदि समय रहते इस अन्यायपूर्ण फ़ैसले का कड़ा विरोध नहीं किया गया, तो आने वाले समय में अन्य सार्वजनिक उपक्रमों में भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति
वर्ग के अधिकारों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।
हम केंद्र की मोदी सरकार और भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन से मांग करते हैं कि इस जनविरोधी और संविधान विरोधी फैसले को तत्काल वापस लिया जाए और एससी-एसटी कर्मचारियों के वेतन से काटी गई फीस को वापस लौटाया जाए। यदि इस तुगलकी फरमान को अविलंब निरस्त नहीं किया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।




