- September 28, 2026
कोल घोटाले में सूर्यकांत तिवारी की डायरी में विधायक देवेंद्र यादव का नाम, आरोप : पूरे मामले में 540 से 570 करोड़ की काली कमाई की गई, ईओडब्लू ने रायपुर दफ्तर में दो घंटों देवेंद्र से की पूछताछ

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
प्रदेश के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले की जांच इंडी के साथ ईओडब्लू भी कर रही है। शनिवार को समन देकर ईओडब्लू ने भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव को भी तलब किया था। अफसरों के मुताबिक के करीब दो घंटे तक देवेंद्र से दफ्तर में पूछताछ की गई। हालांकि यह भी पता चला है कि देवेंद्र ने खुद पर लगे सभी -तरह के आरोप को निराधार बताया है। दो घंटे की पूछताछ के बाद देवेंद्र वापस – लौट आए। शुक्रवार को समन तामिली के लिए ईओडब्लू से एक सिपाही को भिलाई भेजा गया था। सूत्र बताते हैं कि देवेंद्र का नाम सूर्यकांत तिवारी से जब्त डायरी से सामने आया है। उक्त डायरी में देवेंद्र तक पैसा पहुंचने का दावा किया गया है। इसी की तस्दीक के लिए विधायक को ईओडब्लू के दफ्तर पर तलब किया गया था। जानकारी के मुताबिक घोटाले के संबंध में पूछताछ के लिए विधायक को दोबारा भी बुलाया जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक इस घोटाले के तहत कोयला व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से हर टन कोयला परिवहन के एवज में 25 रुपए की अवैध वसूली की जाती थी। राज्य के खनन विभाग के नियमों में बदलाव कर ऑनलाइन मिलने वाले कोल परमिट को ऑफलाइन किया गया था। जिससे एक खास सिंडिकेट ने अपनी मनमानी चलाई और वसूली का यह पूरा तंत्र खड़ा किया। ईडी और एंटी करप्शन ब्यूरो के अनुसार इस अवैध उगाही के जरिए लगभग 540 से 570 करोड़ रुपए से अधिक की काली कमाई की गई। जिसका इस्तेमाल राजनीतिक फंडिंग, रिश्वतखोरी और संपत्तियां खरीदने में वि किया गया। ईओडब्ल्यू ने ईडी की रिपोर्ट सम और अपनी जांच के आधार पर कई नामजद नेताओं, अफसरों और व्यापारियों ती के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और क चार्जशीट कोर्ट में पेश की है।
पूरे अवैध लेवी वसूली सिंडिकेट का मुख्य सरगना सूर्यकांत तिवारी को बताया गया है। कोयला घोटाले में ईओडब्लू ने आईपीसी की धारा 384, 420, 120-बी, 467, 468, 471 और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच इस सिंडिकेट की ओर से करीब 540 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली की गई। लेन-देन के लिए वॉट्सऐप पर पाल, में दुर्ग, वीकली, टावर और जुगनू नाम से ग्रुप बनाए गए थे, जिनमें बातचीत में कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जाता था। खबर यह भी है कि पैसे का उपयोग बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी में हुआ। आदिवासियों के नाम से जमीनें खरीदी हैं। इस मामले में भी जांच की जा रही है।




