- October 5, 2026
जमीन कारोबारी मनोज शासन प्रशासन के साथ सरकार को दे रहा है चुनौती, मनोज लेआउट के भीतर कई खसरों पर हजारो वर्ग फीट में अवैध निर्माण

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

दुर्ग । जमीन कारोबारी मनोज राजपूत के खिलाफ नियम व कानून का खिलवाड़ कर के शासन की अनुमति के बिना अवैध निर्माण करने की शिकायत का सिलसिला लगातार जारी है। डिपरा पारा निवासी लाखन सिंह ने खसरा भूमि 1/2 में आठ हजार वर्ग फ ीट की भूमि पर 40 हजार वर्ग फ ीट की परिधि में पांच मंजिला व्यवसायिक शादी भवन के निर्माण के साथ भूमि खसरा नं. 4/16 में दस हजार वर्ग फ ीट पर कार्यालय निर्माण व उससे लगे खसरे 19/4, 19/2 18/1 में नगर निगम व प्रशासन की अनुमति के बिना अवैध निर्माण किए जाने की शिकायत प्रदेश के मुख्य मंत्री विष्णुदेव साय व वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी से की है। मनोज राजपूत के खिलाफ प्रशासन के नगर तथा ग्राम-निवेश विभाग व नगर निगम के पास दर्जनो शिकायते लंबित है लेकिन प्रशासन उसके विरुध्द कार्यवाही करने का साहस अभी तक नहीं जुटा पाया है।
शिकायत के अनुसार सारा अवैध निर्माण कृषि भूमि पर किया गया है। दुर्ग राजनांदगांव बायपास मार्ग पर टोल प्लाजा के पास जमीन कारोबारी मनोज राजपूत के द्वारा मनोज ले आउट के नाम पर पूरी एक कालोनी बना की दी गई है। कृषि भूमि पर निर्माण के लिए व्यपवर्तन व डायवर्सन की प्रक्रिया का पालन जरूरी है। ले-आउट के लिए भी नगर तथा ग्राम-निवेश विभाग की अनुमति आवश्यक है। उसके बाद नगर निगम से निर्माण की अनुमति लेना भी शासन के नियम के तहत जरूरी है। लेकिन मनोज गजपूत द्वारा नियम व कानून का उलंघन करके अवैध निर्माण कर शासन व प्रशासन को खुली चुनौती दी जा रही है। मनोज राजपूत द्वारा जिस क्षेत्र में अवैध निर्माण किया गया है यह क्षेत्र नगर निगम की सीमा में आता है। लेकिन निर्माण से पहले किसी भी तरह की कोई अनुमति नही लेकर शासन को राजस्व के रूप में लाखो करोड़ो रूपए का नुक्सान पहुंचाया गया है। नगर निगम के मक्न अनुज्ञा विभाग का स्पष्ट कहना है कि मनोज ले आउट के भीतर जितने भी निर्माण किए गए है उनमें से किसी की भी कोई अनुमति नही ली गई है। शिकायत में उल्लेख है कि खसरा नं. 4/16 में दस हजार वर्ग फीट पर व्यवसायिक निर्माण कर कार्यालय बनाया गया है तथा सिकोला स्थित इससे लगी भूमि 19/4, 19/2 व 18/1 पर भी नगर निगम की अनुमति के बिना अवैध निर्माण किया गया है। उसके लिए डायवर्सन व व्यपवर्तन की शासकीय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। शिकायत कर्ता ने इस मामले में जमीन कारोबारी पर कड़ी कार्यवाही की मांग करते हुए अवैध निर्माण को तोड़े जाने का आग्रह किया है।
दो मंत्रियों के गृह नगर हो रहा है नियम व कानून से खिलवाड
दुर्ग शहर विधानसभा प्रदेश में सत्तासीन भाजपा सरकार के दो मंत्रियों का गृहनगर है। दुर्ग शहर विधान सभा के विधायक गजेन्द्र यादव केबिनेट मंत्री हैं और स्कूल शिक्षा विधि विधासी विभाग देख रहे हैं वही दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष है। श्री चंद्राकर को भी केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। श्री चंद्राकर भी दुर्ग शहर में निवास करते है। प्रदेश के इन दो मंत्रियों के गृहनगर में जमीन कारोबारी मनोज राजपूत नियम व कानून की सरे आम धज्जियां उड़ा रहा है। प्रशासन व नगर निगम द्वारा अवैध निर्माण के मामले में चुप्पी संदेह का विषय है। एक जमीन कारोबारी के आगे शासन प्रशासन के साथ सरकार का बेबस व लाचार होना दुर्भाग्य का विषय है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का नही हो रहा है पालन
माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिसंबर 2024 में राजेन्द्र बडज़ात्या विरुध्द उत्तर प्रदेश आवास निगम विकास परिसर तथा वर्ष 2026 में कनिज अहमद विरुध्द साबुददीन के एतिहासिक फैसले में कहा गया है कि जो व्यक्ति भवन अधिकारी या सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना आवासीय या व्यवसायिक निर्माण करता है वह कानून को अपने हाथ में ले लेता है ऐसा पूरा निर्माण अवैध निर्माण कहलाता है। ऐसा व्यक्ति किसी भी तरह की दया की पात्रता नहीं रखता। ऐसा अतिक्रमणकारी / अवैध निर्माणकारी यह बचाव भी नहीं ले सकता कि उसने काफ ी पहले यह निर्माण किया है तथा ऐसे निर्माण को तोड़कर ध्वस्त करने में नगर निगम ने या सक्षम अधिकारी ने कोई गलती नही की है। शासन कलेक्टर नगर निगम आयुक्त का यह नैतिक दायित्व व कर्तव्य है कि जब उसके पास कोई भी व्यक्ति उनके क्षेत्र में संबंधित ऐसे गंभीर अवैधानिक कृत्य की शिकायत करता है तो उस पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए सुुप्रीम कोर्ट द्वारा यह भी कहा गया है कि जो अधिकारी अवैध निर्माण को प्रोत्साहन देता है वह भी उतना ही जवाबदार है।




