- October 12, 2026
चाने ने मां से हड़पी जमीन को मनोज के साथ मिलकर साढ़े तीन करोड़ में बेचा, मां ने अनुविभागीय राजस्व में की है अपील, कलेक्टर व एसपी से शिकायत

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
दुर्ग । अंचल में करोड़ों रुपए के जमीन फर्जीवाड़े के एक से एक खुलासे हो रहे हैं। परिवार के अन्य सदस्यों के हक में डाका डालकर पहले जमीन हड़पी गई उसके बाद जमीन कारोबारी के साथ सांठ गाँठ करके करोड़ो रूपये में जमीन को अवैध प्लाटिंग कर के बेच दिया गया। धोखाधड़ी की शिकार हुई माता ने अपने ही पुत्र के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के न्यायालय में अपील की है। इस मामले को उजागर करते हुए डिपरा पारा निवासी लाखन सिंह ने मालवीयनगर दीपक नगर निवासी प्रविन्दर चाने पिता स्व. रणवीर सिंह चाने नेहरू नगर भिलाई निवासी जमीन कारोबारी मनोज राजपूत पिता जवाहर सिंह राजपूत, शुभम राजपूत पिता लक्ष्मी नारायण राजपूत के खिलाफ कूटरचित फर्जी दस्तावेज मुख्तयार नामा कूटरचित नामांतरण के आधार पर बंटवारा कराकर जमीन की रजिस्ट्री कराकर अवैध प्लाटिंग कर करोड़ो रुपए का अनुचित लाभ हासिल करने की शिकायत जिलाधीश व जिला पुलिस अधीक्षक, से की है और बी.एन. एस. की धारा 61 (2) 318(4) 335, 337, 338 और 340 के तहत अपराध पंजीबध्द करने का आग्रह किया है। शिकायतकर्ता लाखन सिंह ने शिकायत में 4 मई 2026 का तहसीलदार दुर्ग का आदेश, श्रीमती दिलजीत कौर का कूटरचित नामांतरण आवेदन, 21 नवंबर 2025 का कूटचित शपथ पत्र तहसील न्यायालय की संपूर्ण आदेश पत्रिका हस्तलिपि विशेषज्ञ की रिपोर्ट 19 दिसंबर 2025 का फर्जी मुख्तयार नामा के साथ स्व.रणवीर सिंह चाने के वारिसों का पहचान पत्र आधार पेन डिटेल भी संलग्न किया है।
जानकारी के अनुसार करहीडीह जिला दुर्ग स्थित भूमि खसरा नंबर 183/2 रकबा 0.800 रणवीर सिंह चाने के हक व स्वामित्व की भूमि थी। रणवीर सिंह चाने की मृत्यु के बाद पुत्र प्रविन्दर चाने ने माता दिलजीत कौर को जानकारी दिए बिना आवेदन पत्र प्रस्तुत कर संपूर्ण कार्यवाही स्वयं खास मुख्तयार की हैसियत से करते हुए उपरोक्त खसरा नंबर की भूमि का आवेदन पत्र अपने स्वयं के नाम पर तथा नाम मात्र की भूमि माता श्रीमती दिलजीत कौर चाने के नाम पर अवैधानिक रूप से दर्ज करवाकर फर्जी कागजो के आधार पर बंटवारा करा लिया गया है। संपूर्ण प्रकरण में कही भी आवेदक के रूप में श्रीमती दिलजीत कौर चाने के हस्ताक्षर नहीं है और ना ही फर्द बंटवारा में श्रीमती दिनजीत कौर चाने के हस्ताक्षर हैं फिर भी न्यायालय को गुमराह कर और कूटरचित दस्तावेज का निर्माण कर श्रीमती दिलजीत कौर चाने की जमीन को हड़पने की नीयत से प्रविन्दर सिंह चाने ने अपने नाम पर दर्ज करा लिया है। यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि यदि श्रीमती दिलजीत कौर चाने एवं प्रविन्दर चाने के मध्य प्रश्नाधीन भूमि के संबंध में कोई बंटवारा हुआ होता तो श्रीमती दिल जीत कौर चाने के सभी पुत्र पुत्रियों के मध्य संपत्ति का बंटवारा हुआ होता। श्रीमती दिलजीत कौर चाने के प्रविन्दर चाने के अतिरिक्त दो अन्य पुत्र कुलविन्दर सिंह एवं हरविन्दर सिंह तथा पुत्री रजिन्दर कौर भी है उन्हे भी बंटवारे में संपत्ति दी गई होती। परन्तु प्रविन्दर सिंह चाने द्वारा उपरोक्त सभी तथ्यों को छिपाकर न्यायालय के समक्ष यह कथन किया गया है कि उसके अलावा श्रीमती दिलजीत कौर चाने का अन्य कोई वरिस नहीं है। इसका उल्लेख न्यायालय के आदेश पत्र में भी है। प्रविन्दर चाने व्दारा सिकोला स्थित भूमि खसरा नं. 28/13 रकबा 0.1900 हेक्टेयर भूमि के नामांतरण में भी फर्जी दस्तावेज का उपयोग किया गया है। इस मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि श्रीमती दिलजीत कौर ने 29 सितंबर 2025 के नामांतरण में हस्ताक्षर ही नही किया है और 21 नवंबर 2025 का दिलजीत कौर चाने का शपथ पत्र में हस्ताक्षर भी फर्जी है इसके अतिरिक्त 13 अक्टूबर 2025 को आवेदन प्रस्तुत करने दिलजीत कौर तहसील कार्यालय ही नहीं आई थी। उनकी जगह नकली व्यक्ति को खड़ा करके फर्जी बटवारे की प्रक्रिया पूरी की गई है। इस प्रकरण में जमीन कारोबारी मनोज राजपूत की मिलीभगत गवाह शिवम रैकवार के शपथ पत्र से सामने आ गई है। शिवम रैकवार मनोज राजपूत का आदमी है। बंटवारे की कार्यवाही के बाद मनोज राजपूत व शुभम राजपूत द्वारा 183/2 रकबा 0.3000 हेक्टेयर भूमि को प्रविन्दर चाने से नाम मात्र का विक्रय प्रतिफल दर्शाते हुए क्रय किया गया है और उसे प्लाटिंग कर विक्रय किया जा रहा है। करहीडीह स्थित भूमि खसरा नं. 183 रकबा 1.6000 के फौती दर्ज प्रकरण में धर्मेन्द्र मेश्राम द्वारा झूठा शपथ पत्र दिया गया है। प्रविन्दर चाने द्वारा कहा गया है कि स्व.रणवीर सिंह चाने का मेरे अलावा कोई जीवित वारिसान नहीं है। बंटवारे के प्रकरण में फोरेन्सिक रिपोर्ट में श्रीमती व दिलजीत कौर चाने के हस्ताक्षर को फर्जी बताया गया है।
लगभग साढ़े तीन करोड़ में इन्हे बेची गई जमीन
खसरा नं. 183/2 में अवैध प्लाटिंग करके जिन्हें जमीन बेची गई है उसमें 183/1 व 179/1 एवं 96/1 को 61लाख 12 हजार में शुभम राजपूत 183/2 को 40 लाख 14 हजार में मनोज राजपूत पिता जवाहर सिंह राजपूत, 183/3 को 10 लाख 56 हजार में नूतन वर्मा पिता भारत लाल 183/4 को 8लाख 80 हजार में अर्णव चक्रवर्ती, 183/5 को 7 लाख 4 हजार में महेश राजपूत 183/6 को 8 लाख 80 हजार में विनीत वर्मा 183/7 को 7 लाख 4 हजार में रामफल यादव, 183/8 को 5 लाख 28 हजार में हेमंत कुमार हिरवानी, 183/9 को 5 लाख 28 हजार में श्रध्दा वर्मा, 183/10 को 25 लाख में श्याम डेवलपर्स, 183/11 को 9 लाख 75 हजार में शरद वर्मा, 183/12 को 10 लाख 56 हजार में योगेन्द्र श्रीवास, 183/13 को 13 लाख 25 हजार में तोषण लाल वर्मा, 183/14 को 12 लाख 4 हजार 800 में श्रीमती तुलू धनकर, 183/15 को 45 लाख 18 हजार में मधुरिमा सिंह, 183/16 को 20 लाख 8 हजार में मोला लक्ष्मी, 183/17 को 15लाख 6 हजार में जयंती वाग, 183/18 को आशुतोष सिंह राजपूत, 183/19 को 16 लाख 75 हजार 500 में ईशांत चंद्राकर, 183/20 को 16 लाख 75 हजार को उषा चंद्राकर तथा 183/23 को 53 लाख 52 हजार में विकास सिंह पिता दुर्गा प्रसाद को बेचा गया है। खसरा 183/21 की नाममात्र की जमीन को दलजीत कौर पति जगत सिंह व 183/22 को शुभम सिंह राजपूत के नाम छोड़ा गया है। इसमें शुभम राजपूत मनोज राजपूत के विक्रय प्रतिफल पर सवाल खड़े किये गये है। इस तरह इस जमीन का विक्रय 3.50 करोड़ के आसपास की राशि में किया गया है।




