- October 31, 2026
तस्करी और गौवंश वध से जुड़े कानूनी प्रावधान और सजाओं का नहीं असर

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
भारत में गौ तस्करी और गौवंश वध से जुड़े कानून मुख्य प्रावधान और सजाएं छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के संदर्भ में, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में अवैध गौ परिवहन या तस्करी पर 7 साल की सजा और रुपए 50000 तक का जुर्माना का कड़ा प्रावधान है, यह अपराध गैर जमानती अपराध है, जिसमें वाहन ज़ब्ती राजसात किया जाता है ,वाहन मालिक पर कानूनी कार्रवाई होती है, जिसमें आरोपी या अभियुक्त को यह साबित करना पड़ता है कि वह अवैध काम नहीं कर रहा है, परिवहन नियम सक्षम अधिकारी की अनुमति और गाड़ी पर निर्धारित फ्लेक्स जानकारी के बिना गौवंश का परिवहन अवैध माना जाता है, अनुच्छेद 48 में राज्य सरकार को गाय और अन्य दुधारू पशुओं के वध पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं, छत्तीसगढ़ में कुल 168 स्लॉटर हाउस है 20वीं पशु संगणना के अनुसार प्रदेश में कुल ₹99.84 लाख गोवंश है, जिसमें भैंस 11.75 लाख, बकरी 40.06 लाख, भेड़ 1.80 लाख,hai गांव संवर्धन के प्रयास छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पशुपालन को बढ़ावा देने और आवारा पशु बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ कृषि विभाग के माध्यम से सुरभि गौतम योजना संचालित की जा रही है जिसके तहत राज्य के सभी 146 विकासखंडों में 10-10 सुरभि गौतम स्थापित करने की मंजूरी दी गई है, कल मवेशी वध के मामले में भारत विश्व में तीसरे नंबर पर है, भारत के 20 राज्यों में गाय की हत्या पर कानूनी प्रतिबंध है उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश ,गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र ,राजस्थान ,बिहार ,छत्तीसगढ़ ,पंजाब , हिमाचल प्रदेश ,उत्तराखंड ,झारखंड कर्नाटक, जिन राज्यों में गावत पर कोई प्रतिबंध नहीं है वे केरल अरुणाचल प्रदेश मेघालय मिजोरम नगालैंड त्रिपुरा सिक्किम मणिपुर और लक्षद्वीप है, भारत में 50 लाख से अधिक आवारा मवेशी पशु , वही पशुधन इसके रखरखाव की बड़ी समस्या है यह समस्या सामाजिक ,आर्थिक और प्रशासनिक चुनौती बन चुकी है, जिसकी वजह से फसलों को नुकसान होता है, किसानों की फसले खराब हो जाती है, सड़क दुर्घटनाएं ,दौड़ कर अचानक आने वाले मवेशियों ,पशुओं के कारण हर साल सैकड़ो दुर्घटनाएं होती है, पशु जनित बीमारियां से इंसानों और पशुओं को भी जोखिम उठाना पड़ता है, पशुओं के आवारा होने का मुख्य कारण पशुओं का दूध देना बंद करना और खेती के लायक ना ही होने के कारण आर्थिक तंगी और चारे की कमी की वजह से पशु चालक उन्हें खुला छोड़ दे रहे हैं, गौ संरक्षण कानून और कड़े नियमों के कारण इनकी खरीद स्वरूप और आवाज ही सीमित हो गई है, गौ संरक्षण के लिए सरकार विभिन्न योजनाएं चलाती है, जिसमें जैविक खेती और पंचगव्य को बढ़ावा देने स्वदेशी नस्लों के संरक्षण, संवर्धन और ब्रीडिंग का ध्यान रखना शामिल है , उत्पादों जैसे दूध, घी ,मक्खन, दही और गोबर उत्पादन के उपयोग को बढ़ाने का कार्य भी होना चाहिए, छत्तीसगढ़ में वर्ष 2025 में कुल दूध उत्पादन 21.62 लाख टन दर्ज किया गया था, इसके अलावा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अनुसार प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 58 लाख किलोग्राम दूध का उत्पादन होता है,गौ से निर्मित से हुए उत्पादों का बहुत बड़ा बाजार होने के बाद भी इसकी आपूर्ति पूरी नहीं हो रही है, जिसकी वजह से त्योहार आते ही मिलावटी दूध ,दही, पनीर ,घी और मिठाइयों का बाजार गर्म हो जाता है इसके बावजूद भी आवारा पशुओं की गौ वंश की समस्या से निजात नहीं मिल रहा, इसके उत्पादों से करोड़ों का व्यापार हो रहा है इस गोवंश को सुरक्षित रखने के लिए अभी तक समुचित प्रयास नहीं किया गया।
ट्राई सिटी एक्सप्रेस, ब्यूरो चीफ बेमेतरा ,योगेश कुमार तिवारी, 94255 64553, 62657 41003




