- December 20, 2025
गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव की तैयारियों को लेकर मंत्री दयाल दास बघेल ने की समीक्षा, अधिकारियों को सौंपी अहम जिम्मेदारियां

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
बेमेतरा।
जिला बेमेतरा के विकासखंड नवागढ़ में 26 से 28 दिसंबर 2025 तक आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव की तैयारियों को लेकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री दयाल दास बघेल ने आज जनपद पंचायत नवागढ़ में अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने महोत्सव को भव्य, सुव्यवस्थित एवं गरिमामय ढंग से संपन्न कराने हेतु संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट एवं ठोस दिशा-निर्देश दिए।
मंत्री श्री बघेल ने कहा कि गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव राज्य स्तर का अत्यंत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें जिले सहित प्रदेशभर से पंथी नृत्य दल, सामाजिक बंधु एवं बड़ी संख्या में सतनाम पंथ के अनुयायी शामिल होंगे। ऐसे में आयोजन की प्रत्येक व्यवस्था उच्च गुणवत्ता एवं समुचित समन्वय के साथ सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने सभी अधिकारियों से सौंपे गए दायित्वों का गंभीरता एवं प्राथमिकता के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया।
बैठक के दौरान मंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर स्वच्छता व्यवस्था, दर्शकों के लिए बैठक व्यवस्था, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, स्वच्छ पेयजल, सुव्यवस्थित पार्किंग, मुख्य मंच एवं अन्य मंचों की तैयारी, कार्यक्रम स्थल की साज-सज्जा, बेरीकेटिंग तथा सुरक्षा व्यवस्था सहित सभी आवश्यक प्रबंध समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से आम नागरिकों, श्रद्धालुओं एवं कलाकारों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया।
समीक्षा बैठक के पश्चात मंत्री श्री बघेल ने प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन करते हुए अधिकारियों को आवश्यक सुधार करने तथा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव छत्तीसगढ़ की लोक कला, संस्कृति और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है, जिसे सफल और यादगार बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि इस महोत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पंथी नृत्य, लोक परंपराओं एवं सामाजिक मूल्यों को राज्य स्तरीय मंच मिलेगा। इससे न केवल लोक कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाइयां प्राप्त होंगी।




