• May 30, 2025

13 साल की उम्र में वैराग्य की राह पर नन्हा डुग्गू, दुर्ग में आयोजित दीक्षा कार्यक्रम में हुए शामिल अरुण वोरा, कहा यह संयम चमत्कार से कम नहीं

13 साल की उम्र में वैराग्य की राह पर नन्हा डुग्गू, दुर्ग में आयोजित दीक्षा कार्यक्रम में हुए शामिल अरुण वोरा, कहा यह संयम चमत्कार से कम नहीं

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

दुर्ग |

महज 13 वर्ष की उम्र में सांसारिक सुखों को त्यागकर संयम और वैराग्य की राह चुनने जा रहे नन्हें रूहान मेहता उर्फ डुग्गू के दीक्षा समारोह में आज शहर के राधाकृष्ण मंदिर प्रांगण, महेश कॉलोनी में भव्य आयोजन हुआ। इस आयोजन में वरिष्ठ कांग्रेस नेता, छत्तीसगढ़ गृह भंडार निगम के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व विधायक अरुण वोरा विशेष रूप से उपस्थित हुए और उन्होंने बालक डुग्गू के इस निर्णय की सराहना करते हुए उसे पूरे समाज के लिए एक मिसाल बताया।

अरुण वोरा ने कहा: इतनी कम अल्पायु में सांसारिक मोह-माया को त्यागकर वैराग्य का मार्ग अपनाना केवल अद्भुत नहीं, बल्कि अत्यंत प्रेरणादायी है। यह डुग्गू की धर्म और संयम के प्रति गहरी निष्ठा का प्रतीक है। मैं भगवान आदिनाथ से प्रार्थना करता हूँ कि उन्हें आध्यात्मिक शक्ति, संयम और सेवा का संबल प्राप्त हो।

इसलिए हुआ आयोजन

यह आयोजन श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर ट्रस्ट द्वारा ‘सत्वनाद संयमोत्सव’ के अंतर्गत आयोजित किया गया। दीक्षा विधि विनय कुशल मुनिजी महाराज साहब के सान्निध्य में संपन्न हुई। दीक्षा कार्यक्रम से पहले लापसी लूट, महाभिनिष्क्रमण यात्रा और शोभायात्रा जैसे पारंपरिक धार्मिक आयोजन भी हुए, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

कौन हैं डुग्गू

डुग्गू का असली नाम रूहान मेहता है। उनका जन्म 1 जून 2012 को जोधपुर, राजस्थान में हुआ था। वे श्री आशुतोष मेहता एवं श्रीमती सोनल मेहता के सुपुत्र हैं। वर्तमान में डुग्गू अपने परिवार के साथ दुर्ग में रह रहे हैं। डुग्गू ने कभी औपचारिक शिक्षा नहीं ली, नर्सरी या केजी जैसी कक्षाएं भी नहीं पढ़ीं, लेकिन वे धार्मिक शिक्षा में अत्यंत पारंगत हैं। बचपन से ही वे मंदिर, साधु-संतों और धार्मिक क्रियाकलापों के प्रति आकर्षित रहे हैं।

आध्यात्मिक चमत्कार: इतनी छोटी उम्र में इतनी ज्ञान साधना

डुग्गू ने जैन धर्म के 45 आगमों में से 22 आगम, चार कर्म ग्रंथों के दो हजार सूत्र, संस्कृत श्लोक, प्राचीन स्तवन, और पतिक्रमण विधियाँ कंठस्थ कर ली हैं। यह ज्ञान किसी चमत्कार से कम नहीं, जिसे देखकर समाज स्तब्ध है।

अरुण वोरा की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया। उन्होंने बालक डुग्गू के माता-पिता को भी बधाई देते हुए कहा कि यह त्यागमय निर्णय स्वयं परिवार के संस्कारों का प्रतिबिंब है।


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