- June 29, 2025
संविधान बचाओ रैली: भाजपा की तानाशाही नीतियों के ख़िलाफ़ भिलाई से उठी कांग्रेस की हुंकार

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
भिलाई के कला मंदिर परिसर में आज “संविधान बचाओ यात्रा” का आयोजन किया गया। यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना की रक्षा के लिए कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा है।
इस रैली में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री अरुण वोरा, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक बदरुद्दीन कुरैशी, भिलाई जिला अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर और महापौर नीरज पाल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कांग्रेस पार्टी इन दिनों देशभर में ‘संविधान बचाओ आंदोलन’ चला रही है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य बीते 11 वर्षों में भारतीय संविधान पर बढ़ते खतरों को जनता के सामने लाना है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लगातार कमजोर किया है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास किया है।
इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने कहा:
आज की भाजपा सरकार इतनी असहाय और बौखलाई हुई है कि उसे अपनी विचारधारा को थोपने के लिए प्रशासनिक तंत्र का सहारा लेना पड़ रहा है।25 जून 2025 को, केंद्र की भाजपा सरकार के निर्देश पर दुर्ग प्रशासन द्वारा ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाया गया — यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक काला अध्याय है. भाजपा सरकार के 11 वर्षों में भले ही आपातकाल की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई हो, लेकिन मीडिया की स्थिति 1975-77 के आपातकाल से भी ज़्यादा भयावह हो चुकी है। आज सच बोलना गुनाह बन गया है। असहमति की आवाज़ को कुचला जा रहा है, और अधिकांश मुख्यधारा मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल का प्रचारतंत्र बन गया है।महात्मा गांधी ने चेताया था कि यदि किसी सरकार ने मीडिया को अपने प्रचार का औजार बना लिया, तो देश तानाशाही की ओर बढ़ जाएगा। दुर्भाग्य से आज वही चेतावनी और डरावनी कल्पना साकार हो रही है — और इससे हमारा लोकतंत्र, हमारी संविधान की आत्मा, गहरे संकट में है।
‘संविधान बचाओ आंदोलन’ के ज़रिए कांग्रेस आम जनता को यह संदेश देना चाहती है कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा केवल राजनीतिक दलों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। पार्टी का दावा है कि आज का दौर लोकतंत्र के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समय है, और ऐसे में संविधान को बचाना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है।




