• July 15, 2025

पदमनाभपुर पुलिस की लापरवाही: एक माह से लापता संतबाई का कोई सुराग नही

पदमनाभपुर पुलिस की लापरवाही: एक माह से लापता संतबाई का कोई सुराग नही

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

दुर्ग । आर्थिक रूप से संपन्न परिवार का कोई सदस्य लापता हो जाए तो पुलिस उसकी पतासाजी में दिन रात एक कर देती है, लेकिन जब मामला गरीब परिवार से संबंधित हो तब पुलिस की कार्यप्रणाली लचर साबित हो जाती है। पद्मनाभपुर थाने में एक महिला के लापता होने की शिकायत एक माह पहले की गई है, लेकिन पुलिस ने इस मामले में अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की है। इससे पुलिस महकमें की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गये है।
जानकारी के अनुसार बोरसी भाठा वार्ड 50 में भावना मेडिकल के पास निवासरत 38 वर्षीय महिला संतबाई साहू पिछले एक माह से अधिक समय से लापता है। संतबाई साहू रोजी मजदूरी का काम करती है और टी.बी. की मरीज है। संतबाई की बहन कविता साहू ने बताया कि वह 29 मई को सुबह 11 बजे टी.बी. की दवाई लेने अस्पताल जाने के नाम से घर से निकली थी। लेकिन पिछले डेढ़ माह से अभी तक लापता है। संतबाई साहू के तीन बच्चे है और पति गोविन्द साहू मकान निर्माण के मिस्त्री का काम करता है। कविता ने बताया कि उन्होंने लापता होने के दूसरे दिन पद्मनाभपुर थाने में जाकर संतबाई की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने 36 घंटे के बाद पतासाजी का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक वह संतबाई की तलाश नहीं कर पाई है।
कविता ने बताया कि संतबाई साहू के पास दो सिम वाला मोबाइल है जिसका नंबर 8962750230 एवं 9202688902 है। शिकायत में उन्होंने पुलिस विभाग को इन दोनों नंबरों की भी जानकारी दे दी है। लेकिन पुलिस मोबाइल के लोकेशन के आधार पर भी अभी तक कोई पतासाजी नहीं की है। संतबाई साहू की बहन कविता का कहना है कि वह आधा दर्जन से अधिक बार पद्मनाभपुर थाने का चक्कर लगा चुकी है लेकिन उसकी बहन का अभी तक कोई पता नहीं लगा पाया है। संतबाई के लापता हो जाने से उसके बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चे रोज अपनी मां को याद करते है। पूरा परिवार संतबाई के लापता होने से परेशान है। लापता लोगों की खोजबीन के मामले में पुलिस कितनी गंभीर यह इसका ज्वलंंत उदाहरण है। संतबाई कहां है, कही वह कोई दुर्घटना या अप्रिय हादसे का शिकार तो नहीं हो गई है, इस तरह की आशंकाओं से पूरा परिवार भयभीत है। इसे मानव तस्करी से भी जुड़े होने के कयास लगाए जा रहे है। मोबाइल नंबर दिए जाने के बाद भी पुलिस का इस मामले में खाली हाथ बैठे रहना समझ से परे है। इस मामले में जिला पुलिस अधीक्षक से व्यक्तिगत रूचि लेकर पहल करने की मांग की गई है।


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