• August 6, 2025

पुप्षवाटिका की जगह को लेकर विवाद, जमीन का हक दिलाने पीड़ित ने पीएम मोदी से लगाई गुहार

पुप्षवाटिका की जगह को लेकर विवाद, जमीन का हक दिलाने पीड़ित ने पीएम मोदी से लगाई गुहार

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

 

 

दुर्ग। जल आवर्धन योजना को लेकर महमरा एनीकट के करीब अधिग्रहित की गई जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस क्षेत्र में नगर निगम दुर्ग ने इंटकवेल और पेयजल से जुड़ी पाइपलाइन बिछाए जाने के नाम पर जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया, उस जमीन के एक बड़े हिस्से का उपयोग ही नहीं किया गया। वर्तमान में इस जमीन के एक बड़े हिस्से में पुष्पवाटिका का निर्माण हो गया। इसे लेकर आपत्ति की गई है। यह आपत्ति ब्राह्मणपारा निवासी नारायण शर्मा द्वारा की गई है। उन्होंने इसकी लिखित शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कर मामले में निष्पक्ष जांच कर जमीन का अधिकार दिलाए जाने की आवाज उठाई है। वहीं उन्होंने विधायक गजेंद्र यादव से भी मांग है कि इस मामले को वे विधानसभा में उठाए, ताकि सही जानकारी उपलब्ध हो सके। मामले की जनदर्शन में कई दफे शिकायत की जा चुकी है। लेकिन न्याय नहीं मिल पाया है। पीड़ित परिवार की आपत्ति सामने आने के बाद निगम की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लग गया है। बता दें कि यह पूरा मामला वर्ष 1988 का है। इस मामले में शिकायतकतों का आरोप है कि नगर निगम दुर्ग ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अधिकार प्राप्त किया। इसे लेकर मुआवजा भी नहीं दिया गया। वर्तमान में इस जगह पर कई अन्य निर्माण किए गए हैं। साथ ही नए कार्यों को लेकर योजना भी तैयार की जा रही है। इस पर यह पूरी आपत्ति लगाई गई है। बताया गया है कि नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा वर्ष 1988 में जल प्रदाय परियोजना हेतु भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की गई। उस समय लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने करीब 5 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया। जमीन का अधिग्रहण इंटकवेल और जल आवर्धन योजना के अंतर्गत अन्य निर्माण के लिए किया गया, लेकिन जमीन का उपयोग सिर्फ ढाई एकड़ किया गया। नारायण शर्मा ने बताया कि उनके दादा स्व. बालाराम शर्मा के नाम पर दर्ज कृषि भूमि (खसरा नंबर 375/1 एवं 378, कुल रकबा 0.694 हेक्टेयर) का अधिग्रहण किया गया था। इस जमीन का उपयोग नहीं हुआ। बाद में कूटरचित तरीके से बगीचा जोड़कर अधिग्रहित किया जाना बताया गया, जबकि पीएचई के रिकार्ड में इसका उल्लेख नहीं है। इस प्रकार रिक्त जमीन पर 2005 में पुष्प वाटिका का निर्माण कराया गया। वर्तमान इस भूमि का मुआवजा भी नहीं दिया गया। बताया गया है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा दिनांक 15 अप्रैल 1988 को भेजे गए पत्र क्र. 575 में जिन भूमि खसरा नंबरों का उल्लेख किया गया है, उनमें उनके दादा की भूमि शामिल नहीं है। उक्त पत्र में खसरा नंबर 381, 382, 383/1 और 383/3 को परियोजना हेतु आवश्यक बताया गया है। जिस पर ही निर्माण कार्य (इंटक वेल, विद्युत उपकेन्द्र आदि) हुआ है। निगम ने बाद में 23 जुलाई 1988 को भेजे गए पत्र में कूट रचना करते हुए उनके दादा की भूमि को भी परियोजना की प्रावधानित भूमि बताकर अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल किया गया, जबकि उस पर कोई निर्माण नहीं हुआ था। न ही किसी प्रकार का हस्तांतरण हुआ। इस मामले में दुर्ग नगर निगम के आयुक्त सुमित अग्रवाल का कहना है कि फिलहाल इस बारे में जानकारी नहीं है, यदि ऐसा कुछ है तो उसकी जांच होगी। मामला काफी पुराना है, इसलिए स्पष्ट जानकारी नहीं है। शिकायत का परीक्षण करने के बाद इसमें निर्णय लिया जाएगा। यदि अधिग्रहण की प्रक्रिया हुई है, तो मुआवजा भी तय हुआ होगा। अवार्ड भी पारित हुआ होगा।


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