• November 14, 2025

दुर्ग वाटर टैंक हादसा: अरुण वोरा आज पहुंचे फिल्टर प्लांट, गंभीर सुरक्षा खामियों पर जताई चिंता,दिए 5 बड़े सुझाव

दुर्ग वाटर टैंक हादसा: अरुण वोरा आज पहुंचे फिल्टर प्लांट, गंभीर सुरक्षा खामियों पर जताई चिंता,दिए 5 बड़े सुझाव

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

 

दुर्ग शहर में गुरुवार को फिल्टर प्लांट की 11 MLD पानी टंकी से एक युवक का सड़ा-गला शव मिलने से सनसनी फैल गई। प्रारंभिक जांच में पता चला कि शव दो से तीन दिन पुराना था—इस बीच इसी टैंक से शहर के लगभग 30 हजार लोगों को पानी सप्लाई होता रहा। घटना के बाद पानी वितरण रोक दिया गया, लेकिन इसने नगर निगम की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना के बाद दुर्ग के पूर्व विधायक अरुण वोरा आज पूर्व महापौर आर.एन. वर्मा के साथ स्वयं फिल्टर प्लांट पहुँचे और पूरे परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे एक गंभीर घटना बताया, लेकिन किसी रचनात्मक स्वर में सुधार संबंधी सुझाव रखे।

उन्होंने कहा—

> “यह एक बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। इस तरह की घटना किसी भी शहर के लिए चिंता का विषय होती है। हमारा उद्देश्य दोषारोपण नहीं, बल्कि ये सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों.”

*अरुण वोरा द्वारा सुझाए गए सुरक्षा सुधार*

1. पूर्ण सुरक्षा घेरा

– फिल्टर प्लांट की चारों तरफ मजबूत बाउंड्री वॉल और तार-फेंसिंग तत्काल बनाई जाए।
– प्रवेश और निकास द्वारों पर गेट पास सिस्टम, गार्ड रजिस्टर अनिवार्य किया जाए।

2. आधुनिक निगरानी व्यवस्था
– पूरे परिसर में हाई-रिज़ोल्यूशन CCTV कैमरे लगाए जाएँ, जिनकी 24×7 निगरानी एक कंट्रोल रूम से हो।
– कैमरों की नियमित मेंटेनेंस और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की व्यवस्था हो।

3. सुरक्षा कर्मियों की सख्त तैनाती
– तीनों शिफ्ट में प्रशिक्षित और जिम्मेदार चौकीदार तैनात हों।
– रात की गश्त बढ़ाई जाए और असामाजिक तत्वों की एंट्री पर पूरी रोक लगे।

4. बुनियादी ढांचे की मरम्मत
– टूटे हुए दरवाज़े-खिड़कियों की तत्काल मरम्मत।
– परिसर में प्रकाश व्यवस्था सुधारी जाए, हाई-मास्ट लाइट लगाने की मांग।
– प्लांट के पीछे और आसपास की झाड़ियां काटकर क्षेत्र साफ किया जाए।

5. जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
– घटना की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
– आगामी सभी फिल्टर प्लांटों की सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य हो।
– दूषित पानी सेवन करने वाले उपभोक्ताओं की स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएँ।

*फिल्टर प्लांट में मिली सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख कमियाँ*

1. चौंकाने वाली सुरक्षा कमी
– प्लांट में 3 शिफ्टों में चौकीदार तैनात किए जाते हैं, लेकिन मौके पर उपस्थिति और निगरानी की मजबूती की समीक्षा की जरूरत सामने आई है.
– जिस कमरे में संपवेल और मोटर पंप लगे हैं, वहां की खिड़कियां और दरवाज़े टूटे हुए हैं—किसी भी बाहरी व्यक्ति का अंदर प्रवेश रोकने का कोई उपाय नहीं।
– परिसर की सीमा में न तो बाउंड्री वॉल बनी है और न ही तार-फेंसिंग। यह खुला क्षेत्र अनचाहे लोगों की आवाजाही को आसान बनाता है।

2. असुरक्षित, अंधेरा और बेहिसाब अंदरूनी आवाजाही

– प्लांट के पिछले हिस्से में रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक असामाजिक तत्वों की आवाजाही की शिकायतें लगातार मिल रही हैं
– परिसर में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं, जिससे निगरानी लगभग असंभव हो जाती है।
– आने-जाने वाले लोगों को रोकने-टोकने वाला कोई नहीं, जिससे सुरक्षा पूर्णतः बदहाल दिखती है।

3. आम नागरिकों की सेहत दांव पर

– दूषित पानी सप्लाई के चलते हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़ते हुए जैविक पदार्थ का पानी में रहना गंभीर संक्रमण, पाचन संबंधी बीमारियाँ और वायरल प्रकोप फैला सकता है।


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