- December 15, 2025
रायपुर-बिलासपुर हाइवे पर अगले 20 साल में वसूला जाएगा करीब 3650 करोड़ का टोल, केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने प्राइवेट कंपनी से किया 2611 करोड़ का अनुबंध, दावा ; चमचमाती सड़क, लाइटों से सुसज्जित और मवेशियों से मुक्त सड़क मिलेगी

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
सरकार किस तरह से पब्लिक के जेब में डांका डाल रही है, इसकी एक और बानगी देखने को मिली है। पहले करीब 5 सालों से सड़क बनाने वाली एजेंसी को टोल वसूली का अधिकार दिया। जिन्होंने करोड़ों वसूले, अब जब सड़क बनाने वाली कंपनी मुनाफा कमा ली है, तो नए सिरे से टोल वसूली का एग्रीमेंट किया गया है। वह भी पूरी तरह से गुपचुप तरीके से, ताकि किसी प्रकार का हल्ला न हो। बता दे कि ये मंत्रालय नितिन गडकरी के पास है, जो हर समय अपनी ही पीठ थपथपाते रहते हैं। सड़कों के लिए लाखों करोड़ों जारी करने की बात करते हैं, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और है। टोल के नाम पर पूरे देश में करोड़ों रुपए की वसूली का खेल चल रहा है। मनमाना प्रॉफिट कंपनी कमा रही है। सरकार वसूल रही है और जनता टोल के बोझतले दबती जा रही है।
बता दे नेशनल हाइवे-130 (रायपुर-बिलासपुर) प्रदेश की पहली सड़क है, जिसे प्राइवेट हाथों में सौंप दिया गया है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने 2611 करोड़ में 127 किमी लंबे रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाइवे को नेशनल हाईवेज इन्फ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट (एनएचएआईटी) को 20 साल के लिए ठेके पर दे दिया है। इसे लेकर एनएचएआई और एनएचएआईटी के बीच अनुबंध हो गया है। यह एक तरह का पीपीपी मॉडल होगा। एनएचएआईटी 16 दिसंबर से नेशनल हाइवे पर काम शुरू करेगी।
ठेका शर्त के अनुसार कंपनी को नई कंपनी को सड़क बनाकर देना है यदि पुरानी कंपनी सड़क नहीं बनाती है तो एजेंसी का विभाग में जो पैसा जमा है उस पैसे से टेंडर करके सड़क सुधारने का काम किया जाएगा। वहीं नई कंपनी अगले 20 साल तक हाइवे का रखरखाव, स्ट्रीट लाइट मरम्मत, डिवाइडर मरम्मत, रिफ्लेक्टर लगाना, सौंदर्गीकरण करेगी, हर 20 किमी में एक एंबुलेंस, एक क्रेन घूमेगी, सड़कों से मवेशी हटाने, पूरे रास्ते में प्रति किमी में एक सीसीटीवी कैमरे लगाएगी, मेडिकल सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। यदि कंपनी ठीक से काम नहीं करेगी और पब्लिक सड़क खराब होने की शिकायत करती है तो एनएचएआई क्लोज्ड टेंडर जारी करके काम कराएगी और कंपनी से पैसा भी वसूलेगी।
आठ लेन की होगी सड़क, टेंडर प्रक्रिया शुरू
बिलासपुर नेशनल हाइवे में वाहनों के दबाव को देखते हुए एनएचएआई ने सड़क चौड़ीकरण का फैसला लिया है। इसके तहत रायपुर से सिमगा तक 8 लेन और सिमगा से बिलासपुर तक 6 लेन की सड़क बनाई जाएगी। अभी रायपुर से सिमगा 6 लेन और सिमगा से बिलासपुर तक 4 लेन की सड़क है। एनएचएआई ने डीपीआर के लिए 17 सितंबर को ही टेंडर जारी कर दिया है। ठेका एजेंसी रायपुर से बिलासपुर तक सर्वे करीब छह माह के भीतर रिपोर्ट एनएचएआई को सौंपेगी। यह प्रोजेक्ट करीब एक हजार करोड़ से अधिक का है। एनएचएआई के अफसरों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण का काम विभाग करेगा। लेकिन सड़क के चौड़ीकरण हो जाने के बाद एग्रीमेंट रिवाइज करके नए सिरे से बनाया जाएगा।
2021 में पूरा हुआ 127 किमी सड़क का निर्माण, 1706 करोड़ थी लागत
रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाइवे का निर्माण साल 2020 में पूरा हुआ था।
127 किमी लंबी इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2016 में शुरू हुआ था। इसे तीन फेज में में पूरा किया गया और तीन अलग-अ कंपनियों को निर्माण का ठेका दिया गया। पहली कंपनी पुंज एलायड थी, जिसने रायपुर से सिमगा तक सड़क का निर्माण किया। इसके लिए 806 करोड़ का टेंडर जारी किया गया था। कंपनी ने साल 2021 तक निर्माण पूरा किया। दूसरी कंपनी एलएंडटी थी, जिसे 500 करोड़ में सिमगा से सरागांव तक सड़क बनाने का ठेका मिला। इसी तरह दिलीप बिल्डकॉन तीसरी कंपनी रही, जिसने 400 करोड़ में सारागांव से बिलासपुर तक सड़क बनाई। कंपनी को चार साल तक सड़क की देखरेख का जिम्मा था।
ठेका कंपनी को टोल से ही 20 साल में होगी 3650 करोड़ की आय
नेशनल हाइवे-130 में दो टोल नाके हैं। पहला टोल तरपोंगी में है, जबकि दूसरा टोल भोजपुरी। इन दोनों टोल से एक दिन में औसतन 29 हजार गाड़ियां गुजरती हैं। वहीं इनसे होने वाली आय का आंकड़ा 50 लाख रुपए है। इस तरह जिस कंपनी को सड़क ठेके पर दी जा रही है, वह साल भर में ही दोनों टोल से 182 करोड़ वसूल करेगी। वहीं 20 साल में कंपनी को 3650 करोड़ की आय होगी।




