• December 31, 2025

अधिकारी-कर्मचारियों आंदोलन के समर्थन में उतरे अरुण वोरा, बोले—कर्मचारी किसी भी शासन की रीढ़,वादों पर अमल करे सरकार

अधिकारी-कर्मचारियों आंदोलन के समर्थन में उतरे अरुण वोरा, बोले—कर्मचारी किसी भी शासन की रीढ़,वादों पर अमल करे सरकार

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

 

मोदी की गारंटी लागू करवाने और लंबित मांगों के निराकरण को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर जिलेभर के अधिकारी-कर्मचारी जिला स्तरीय कलम बंद, काम बंद आंदोलन पर चले गए हैं। आंदोलन के चलते कलेक्ट्रेट सहित विभिन्न शासकीय कार्यालयों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा, वहीं एसडीएम व तहसील कार्यालयों में नियत प्रकरणों की सुनवाई नहीं हो सकी। जिन मामलों में आज सुनवाई होनी थी, उनकी आगामी तिथियों की सूचना कार्यालयों के बाहर चस्पा की गई।
फेडरेशन के पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार अधिकारी-कर्मचारी सामूहिक अवकाश लेकर 31 दिसंबर तक आंदोलनरत हैं। इस क्रम में विभिन्न विभागों के कर्मचारी हिन्दी भवन, दुर्ग के सामने एकत्रित होकर दिनभर धरना-प्रदर्शन करते रहे और अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की।
धरना स्थल पर पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने आंदोलनरत अधिकारी-कर्मचारियों को अपना समर्थन दिया। वोरा के पहुँचते ही कर्मचारियों में से कुछ ने मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे मोतीलाल वोरा के कार्यकाल को याद किया। कर्मचारियों ने कहा कि “उस दौर में कर्मचारियों के हितों को लेकर सरकार का रवैया सकारात्मक रहता था और कर्मचारियों को कई प्रकार की सुविधाएँ एवं लाभ समय पर मिलते थे।” उन्होंने यह भी कहा कि उस समय शासन-प्रशासन कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनता और समाधान की दिशा में पहल करता था।

अरुण वोरा ने कहा कि “सरकार को कर्मचारियों के साथ किए गए वादों को केवल कागजों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए। अधिकारी-कर्मचारी प्रशासन की रीढ़ होते हैं और उनकी उपेक्षा करना सुशासन की अवधारणा के खिलाफ है।”

वोरा ने आगे कहा कि “महंगाई भत्ता, वेतन विसंगतियां, कैशलेस उपचार सुविधा जैसी मांगें कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार हैं। यदि सरकार वास्तव में मोदी की गारंटी की बात करती है तो उसे कर्मचारियों की जायज़ मांगों पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।” उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि सरकार को इस चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता लागू करना, डीए एरियर्स को जीपीएफ खाते में समायोजित करना, चार स्तरीय समयमान वेतनमान, विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियां दूर करना, कैशलेस उपचार सुविधा लागू करना, 300 दिवस अर्जित अवकाश नगदीकरण, संविदा व अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा सेवानिवृत्त आयु 65 वर्ष किए जाने जैसी मांगें शामिल हैं।


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