- January 29, 2026
भिलाई स्टील प्लांट दुर्घटना मामला : न्यायालय ने धारा 304 आईपीसी के तहत आरोप विरचित किए जाने हेतु अभियोजन की ओर से प्रस्तुत आवेदन स्वीकार किया

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
भिलाई स्टील प्लांट, एस.एम.एस.-02 यूनिट में घटित गंभीर औद्योगिक दुर्घटना से संबंधित आपराधिक प्रकरण में न्यायालय द्वारा एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया है। यह प्रकरण दिनांक 25 अप्रैल 2023 की उस घटना से संबंधित है, जिसमें संयंत्र परिसर के भीतर वेल्डिंग कार्य के दौरान आग लगने से श्रमिक रंजीत सिंह गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिनकी उपचार के दौरान दिनांक 9 मई 2023 को मृत्यु हो गई थी। उक्त दुर्घटना में अन्य श्रमिक भी गंभीर रूप से घायल हुए थे।
उक्त मामले में आरोपी शिफ्ट इंचार्ज धीरेंद्र कुमार कुशवाहा, जनरल मैनेजर/चीफ जनरल मैनेजर सुशांत कुमार घोषाल, मेसर्स मारुति कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार अभय कुमार बर्तलवार तथा जनरल मैनेजर (सेफ्टी) गौरव सिंघल के विरूद्घ धारा 285, 304 ए भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था, किन्तु आरोपीगण द्वारा कारित अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए प्रकरण में आरोपीगण के विरूद्घ धारा 285, 304 भाग 1 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत आरोप की विरचना करने हेतु अभियोजन की ओर से आवेदन अंतर्गत धारा 216 सहपठित 323 द.प्र.सं./धारा 239 सहपठित 362 भा.ना.सु.सं. प्रस्तुत किया गया था, जिसे न्यायालय ने दोनों पक्षों को समुचित सुनवाई का अवसर प्रदान कर प्रकरण में संकलित साक्ष्य, गवाहों के कथन, मेडिकल दस्तावेज, उप संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवँ सुरक्षा दुर्ग की रिपोर्ट एवँ प्रकरण में संकलित साक्ष्य के आधार अभियोजन की ओर से प्रस्तुत आवेदन पत्र स्वीकार किया।
अभियोजन पक्ष
अभियोजन पक्ष द्वारा न्यायालय के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि दुर्घटना के समय मजदूरों से भूमि सतह से लगभग 5 मीटर नीचे स्थित एक बंद एवं संकुचित स्थान, जिसे वॉटर ट्यूब कैनाल रूम कहा जाता है, में वेल्डिंग कार्य कराया जा रहा था। उक्त स्थान को न तो विधिवत रूप से चिह्नित किया गया था और न ही वहां कार्य किए जाने के संबंध में आवश्यक चेतावनी अथवा सूचना उपलब्ध कराई गई थी।
अभियोजन के अनुसार, कार्यस्थल पर आवश्यक सुरक्षा मानकों का पूर्णतः अभाव था। वहां न तो कार्यशील अग्निशामक यंत्र उपलब्ध थे, न ही समुचित वेंटिलेशन की व्यवस्था की गई थी तथा न ही मजदूरों को ऑक्सीजन ब्रीदिंग उपकरण प्रदान किए गए थे। इसके अतिरिक्त, यह भी तथ्य सामने आया कि भूमि सतह से लगभग 2 मीटर नीचे स्थित एक पाइपलाइन के माध्यम से उक्त बंद स्थान में निरंतर ऑक्सीजन की आपूर्ति हो रही थी, जिसके कारण वहां ऑक्सीजन का स्तर अत्यधिक बढ़ गया। ऐसी स्थिति में वेल्डिंग के दौरान उत्पन्न चिंगारी से आग लगना संभाव्य एवं अपेक्षित था।
अभियोजन पक्ष ने यह तर्क दिया कि आरोपीगण को इस बात का पूर्ण ज्ञान होने के बावजूद कि इस प्रकार की परिस्थितियों में कार्य कराए जाने से मृत्यु की संभावना उत्पन्न हो सकती है, उन्होंने उक्त कार्य की अनुमति दी, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग–II) के अंतर्गत दंडनीय कृत्य है। अतः प्रकरण में धारा 304 भा.दं.सं. के अंतर्गत आरोप निर्धारित किए जाने का आवेदन प्रस्तुत किया गया।
बचाव पक्ष
बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि उक्त घटना एक आकस्मिक दुर्घटना थी तथा किसी भी आरोपी की ओर से कोई आपराधिक आशय या जानबूझकर की गई लापरवाही नहीं थी। यह भी तर्क दिया गया कि मर्ग क्रमांक 18/2023 की जांच में मृत्यु का कारण ‘दुर्घटना में जलने’ के रूप में पाया गया है तथा वर्तमान में धारा 304A भा.दं.सं. के अंतर्गत लगाया गया आरोप ही उपयुक्त है। साथ ही यह भी कहा गया कि ट्रायल प्रारंभ होने से पूर्व आरोप में परिवर्तन करना विधिसंगत नहीं है।
न्यायालय का आदेश
दोनों पक्षों को सुनने तथा प्रकरण के अभिलेखों के अवलोकन उपरांत न्यायालय द्वारा यह निष्कर्ष प्रदान किया गया कि आरोपीगण को इस तथ्य का पूर्ण ज्ञान था कि ऑक्सीजन से परिपूर्ण, बिना वेंटिलेशन वाली तथा अग्नि-सुरक्षा उपायों से रहित बंद स्थान में वेल्डिंग कार्य कराए जाने से गंभीर दुर्घटना एवं मृत्यु की संभावना प्रबल रूप से विद्यमान थी। जबकि किसी भी कारखाना संचालित करने वाली संस्था की यह महत्वपूर्ण एवं वैधानिक जिम्मेदारी होती है कि वह श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक एवं उपयुक्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करे।
न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए धारा 304 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत आरोप तय करने का आवेदन स्वीकार किया। उक्त नवीन धारा अनन्य रूप से सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होने से प्रकरण को सत्र न्यायालय दुर्ग (छ०ग०) उपार्पित किया गया है। प्रकरण में अभियोजन की ओर से श्रीमति अनुभूति झा सहायक जिला अभियोजन अधिकारी ने पक्ष रखा।




