• February 7, 2026

न्याय के साथ मानवीय संवेदना: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग बना संकट का साथी

न्याय के साथ मानवीय संवेदना: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग बना संकट का साथी

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने निभाई “अभिभावक” की भूमिका – न्याय सब के लिए के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने एक बार फिर मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया। एक 16 वर्षीय नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता, जिसकी गर्भावस्था चिकित्सकीय रूप से जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुकी थी, के संपूर्ण उपचार एवं सुरक्षित पुनर्वास में प्राधिकरण ने ‘अभिभावक’ की भूमिका निभाई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला दुर्ग निवासी नाबालिग बालिका दुष्कर्म की घटना के पश्चात गर्भवती हो गई थी। चिकित्सकीय परीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि उक्त गर्भावस्था उसकी शारीरिक एवं मानसिक स्थिति के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण है। इस कठिन परिस्थिति में पीड़िता के परिजन मानसिक रूप से टूट चुके थे और उचित मार्गदर्शन के अभाव में परेशान थे।
सूचना प्राप्त होते ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने त्वरित कार्यवाही करते हुए पीड़िता एवं उसके परिजनों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की तथा संबंधित न्यायालय से समन्वय स्थापित किया। तत्पश्चात महिला पैरा-लीगल वॉलेंटियर को जिला अस्पताल भेजकर पीड़िता की संपूर्ण देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई।
पीएलवी ने निभाई ‘दीदी’ की भूमिका – महिला पैरा-लीगल वॉलेंटियर ने अस्पताल में भर्ती प्रक्रिया से लेकर उपचार तक पीड़िता का निरंतर साथ दिया। चिकित्सकों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की गईं तथा आवश्यकता पड़ने पर रक्त आपूर्ति की भी पूर्ण तैयारी रखी गई। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी अधिनियम, 1971 (संशोधित अधिनियम, 2021) के अंतर्गत स्थानीय शासकीय अस्पताल में विधिवत एवं सफलतापूर्वक चिकित्सीय गर्भपात कराया गया। गर्भपात पश्चात पीड़िता के स्वास्थ्य पर विशेष निगरानी रखी गई तथा आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं के साथ उसे परिजनों सहित सुरक्षित घर भेजने की व्यवस्था की गई।
निःशुल्क वाहन से सुरक्षित घर वापसी:- डिस्चार्ज के पश्चात पीड़िता के परिजनों के पास घर लौटने हेतु कोई साधन उपलब्ध नहीं था। इस स्थिति को देखते हुए पीएलवी द्वारा संबंधित विभाग से समन्वय कर पूर्णतः निःशुल्क शासकीय वाहन की व्यवस्था की गई, जिससे पीड़िता एवं उसके परिजनों को ससम्मान एवं सुरक्षित उनके निवास तक पहुंचाया गया।
यह प्रकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की उस भूमिका को रेखांकित करता है, जहां कानून के साथ-साथ संवेदना, तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण भी समान रूप से उपस्थित रहते हैं। संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान पीड़िता एवं उसके परिजनों की गोपनीयता, गरिमा एवं मानसिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।


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