• June 18, 2026

पांचवीं बार बिजली दर बढ़ाकर भाजपा सरकार ने जनता पर डाला आर्थिक बोझ-भूपेश बघेल

पांचवीं बार बिजली दर बढ़ाकर भाजपा सरकार ने जनता पर डाला आर्थिक बोझ-भूपेश बघेल

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

 

दुर्ग। कांग्रेस ने प्रदेश में बिजली दरों में हुई नई वृद्धि को जनता के साथ बड़ा अन्याय और आर्थिक अत्याचार करार दिया है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार को दुर्ग स्थित राजीव भवन (कांग्रेस भवन) में आयोजित पत्रकारवार्ता में भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता को राहत देने के बजाय लगातार बिजली दरें बढ़ाकर आम उपभोक्ताओं, किसानों और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। मीडिया से चर्चा के दौरान श्री बघेल के साथ दुर्ग जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर, दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री राजेंद्र साहू, दीपक दुबे, जितेंद्र साहू, भिलाई महापौर नीरज पाल, रिसाली महापौर शशि सिन्हा, पूर्व महापौर आरएन वर्मा, नीता लोधी, प्रदेश कांग्रेस सचिव अय्यूब खान, कांग्रेस नेता बृजमोहन सिंह, पालेश्वर ठाकुर, मध्य ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अलताफ अहमद, नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले, दुर्ग कांग्रेस प्रभारी रायसिंह ढिकोला, कांग्रेस प्रवक्ता नासिर खोखर, सुशील भारद्वाज व अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे। चर्चा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद बिजली दरों में यह पांचवीं वृद्धि है। पहले से ही महंगे बिजली बिल और लगातार हो रही बिजली कटौती से जनता परेशान है, लेकिन सरकार राहत देने के बजाय घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तथा गैर घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि कर रही है। इतना ही नहीं, कृषि पंपों की बिजली दरों में भी 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है, जिससे किसानों की लागत और बढ़ जाएगी। श्री बघेल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में बिजली दरों में मात्र 2 पैसे की वृद्धि की थी, वहीं 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना लागू कर आम लोगों को बड़ी राहत दी गई थी। भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही इस योजना को बंद कर दिया और अब लगातार बिजली दरें बढ़ाकर जनता की जेब पर डाका डाल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि हाल ही में भाजपा सरकार ने 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (एमपीपीएस) लगाकर बिजली को और महंगा कर दिया था। अब नई दर वृद्धि के बाद जनता पर दोहरी मार पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिजली विभाग के माध्यम से उपभोक्ताओं को बिल के नाम पर लूटने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को सामान्य बिल की तुलना में तीन से चार गुना अधिक राशि के बिल भेजे जा रहे हैं। कई मामलों में एक ही माह के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन अलग-अलग बिल जारी किए गए हैं, जिससे उपभोक्ताओं में भ्रम और नाराजगी है। श्री बघेल ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं की सहमति के बिना उनके बिजली कनेक्शन का अनुबंध भार (लोड) बढ़ा रहा है, जबकि नियमानुसार ऐसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर के माध्यम से अधिक खपत दर्शाई जा रही है और फिर उसी आधार पर उपभोक्ताओं का अनुबंध भार बढ़ाकर अतिरिक्त शुल्क एवं अर्थदंड लगाया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जून माह में प्रदेश के 45 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को औसत से लगभग तीन गुना अधिक बिल प्राप्त हुए हैं। इससे आम जनता में भारी नाराजगी है और लोग बिजली विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार प्रदेश में 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में भी असफल साबित हुई है। एक ओर लगातार बिजली कटौती हो रही है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को भारी-भरकम बिल भेजे जा रहे हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से बिजली कटौती तथा बढ़े हुए बिलों की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। श्री बघेल ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों से बिजली के बढ़े हुए बिलों का बोझ जनता झेल रही थी, लेकिन इस बार स्थिति और गंभीर हो गई है। प्रदेश के लगभग हर जिले से शिकायतें आ रही हैं कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली खपत असामान्य रूप से बढ़कर दिखाई जा रही है और उसी के आधार पर बिल तैयार किए जा रहे हैं। मीडिया से चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बढ़े हुए बिजली बिलों के लिए तीन प्रमुख कारण बताए। उन्होंने कहा कि पहला कारण भाजपा सरकार द्वारा लगातार बिजली दरों में वृद्धि किया जाना है। दूसरा कारण कांग्रेस सरकार की बिजली बिल हाफ योजना को बंद किया जाना है। तीसरा और सबसे बड़ा कारण स्मार्ट मीटर हैं, जो वास्तविक खपत से अधिक रीडिंग दिखा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के बिल कई गुना बढ़कर आ रहे हैं। श्री बघेल ने कहा कि उत्तरप्रदेश सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जनता की शिकायतों को देखते हुए स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर पुनर्विचार किया गया है। उन्होंने मांग की कि छत्तीसगढ़ सरकार भी जनहित में स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा करे और जरूरत पड़े तो इसे वापस ले।


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