• July 14, 2026

जिले में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था हो रही है तार-तार एग्रीमेन्ट व इस्टीमेट बनाये बिना कर दिया 7 लाख रु.का भुगतान

जिले में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था हो रही है तार-तार एग्रीमेन्ट व इस्टीमेट बनाये बिना कर दिया 7 लाख रु.का भुगतान

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

 

दुर्ग । ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत को मिलाकर ही त्रिस्तरीय पंचायतराज व्यवस्था स्थापित की गई है। जिसमें ग्राम पंचायत गांव स्तर पर जनपद पंचायत ब्लाक व विकास खंड स्तर पर एवं जिला पंचायत को जिला स्तर पर काम करना है। तीनो स्तर आपस में जुड़े हो और मिलकर काम करें। ऐसा प्रावधान अधिनियम में बनाया गया है लेकिन जिला पंचायत की कार्यशैली से न केवल शासन के आदेश की अवहेलना हो रही है बल्कि पंचायती राज अधिनियम का सरे आम उलंघन भी हो रहा है अंजोरा ख में डी.पी.आर सी. संसाधन केन्द्र के निर्माण के नाम पर भ्रष्टाचार व अनियमितताओं को लेकर जिला पंचायत के सी.ई. ओ. बजरंग दुबे एवं उप संचालक आकाश सोनी के विरुध्द प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से शिकायत की गई है।
शिकायत में कहा गया है कि जिला पंचायत अंजोरा ख के डी.पी.आर सी. (जिला पंचायत संसाधन केन्द्र) के निर्माण कार्य में नियमों को पूरी तरह से दरकिनार किया गया है और मनमाने तरीके से प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। जनपद पंचायत को भी पूरी प्रक्रिया से दूर रखा गया है। सीधे पंचायत के खाते में सात लाख रुपए जमा कर दिए गए। जबकि काम शुरू होने से पहले पंचायत स्तर पर कोई प्रस्ताव नही बनाया गया था। बाद में बैक डेट पर प्रस्ताव तैयार किया गया। आश्चर्य व हैरत की बात यह है कि ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा विभाग के इंजीनियर ने काम शुरु करने के पहले कोर्ड एस्टिमेट भी तैयार नहीं किया है। शिकायत में कहा गया है कि नियमानुसार कार्य के पहले तकनीकी स्वीकृति प्रदान करना और मूल्यांकन व सत्यापन जरुरी होता है लेकिन इस काम के लिए कोई इंजीनियर नियुक्त ही नही किया गया।
इस मामले में शिकायत कर्ता का आरोप है कि विकास कार्य के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित करना अनिवार्य होता है लेकिन इस मामले में पंचायत में कोई प्रस्ताव पारित नही हुया था। यह प्रक्रिया पूरी तरह में गैरकानूनी है। पंचायत अधिनियम के प्रावधान के अनुसार कार्य शुरु होने से पहले ग्राम स्तर पर मंजूरी आवश्यक है। जनपद पंचायत की मंजूरी भी जरूरी है लेकिन समन्वय के बिना ही जिला पंचायत ने सीधे ग्राम पंचायत को पहली किश्त के तौर पर सात लाख रुपए जारी कर दिए। यहां गौरतलब है कि हर सरकारी कार्य में ठेकेदार या वेन्डर के साथ एग्रीमेन्ट किया जाता है। इसके बिना ही रंग रोगन मरम्मत फर्नीचर खरीदी और अन्य सामग्री के लिए कार्य शुरु कर दिया गया। पहली किश्त की राशि में दो लाख दस हजार रुपए मजदूरी और चार लाख नब्बे हजार रुपए सामग्री पर खर्च दस्तावेजों में दिखाया गया है। इस तरह जिला पंचायत द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था का माखौल उड़ाते हुए तार तार किया गया है और मनमानी करते हुए नियम की धज्जियां उड़ाई गई है। इस संबंध में संवाददाता संतोष मिश्रा द्वारा जिला पंचायत के सी.ईओ. से मुलाकात कर उनका पक्ष लेने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे मुलाकात नही हो पाई।
रायपुर के एक बड़े नेता के दामाद से दोस्ती के कारण कार्यवाही नही
जिला पंचायत के सी.ई.ओ. बजरंग दुबे के खिलाफ की गई शिकायत पर किसी भी तरह की जांच व कार्यवाही नही होने के पीछे चर्चा के रूप में रायपुर के एक बड़े नेता के दामाद के साथ दोस्ती का कारण भी सामने आया है । शिकायत में जिला पंचायत परिषद में प्रस्ताव स्वीकृति अनुशंसा व अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया की भी जांच की मांग की गई है और कहा गया है कि घोटाले भ्रष्टाचार व अनियमितता की आड़ में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40,53,83,84 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 व 13 तथा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 468 व 477 ए का भी उलंघन किया जा रहा है। शिकायत की प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय को भी प्रेषित की जा रही है।
जिले के मंत्रियों से पहल की मांग
जिला पंचायत में हो रही मनमानी गड़बड़ी व नियम विरुध्द कार्यो को लेकर की गई शिकायत के संबंध में जांच व कार्यवाही के लिए जिले के दो मंत्रियो गजेन्द्र यादव व ललित चंद्राकर से भी पहल की मांग की गई है। दुर्ग शहर के विधायक गजेन्द्र यादव सरकार में स्कूल शिक्षा व विधायी विभाग के केबिनेट मंत्री हैं जबकि दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर छत्तीसगढ राज्य गमीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं इन्हें भी केबिनेट मंत्री का दर्जा मिला हुआ है।


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