- August 13, 2026
फर्जी मुख्तयारनामा का उपयोग कर पुत्र ने हड़पी मां की जमीन कलेक्टर व एसपी से शिकायत, तहसीलदार की भूमिका पर उठे सवाल

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
दुर्ग। शहर में एक पुत्र द्वारा कूटरचित व फर्जी मुख्तयारनामा के जरिए अपनी ही माता के स्वामित्व व हक की भूमि को सुनियोजित तरीके से हडपने का मामला सामने आया है। इस मामले में डिपरायारा निवासी लाखन सिंह ने मालवीयनगर दीपक नगर निवासी प्रविन्दर चाने पिता स्व. रणवीर सिंहचाने के विरुध्द जिलाधीश व जिला पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है। हैरत की बात यह है कि इस संपूर्ण प्रकरण में प्रविन्दर चाने की माता दिलजीत कौर चाने के कही भी आवेदक के रूप में और फ र्द बंटवारा में हस्ताक्षर नहीं है। फि र भी न्यायालय को गुमराह कर कूटरचित दस्तावेज का निर्माण कर श्रीमती दिलजीत कौर चाने की जमीन को प्रविन्दर चाने ने अपने नाम करा लिया है। इस प्रकरण में तहसीलदार प्रफु ल्ल गुप्ताकी भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। इस प्रकरण का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि सारी प्रक्रिया में है दिलजीत कौर चाने की जगह किसी अन्य नकली महिला को खड़ा किया गया है। इस मामले में दोषी लोगों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 318 (4) 335,337,338 340 के तहत अपराधिक प्रकरण दर्ज करने का आग्रह किया गया है।
जानकारी के अनुसार प्रविन्दर सिंह चाने द्वारा * अपनी माता दिलजीत कौर चाने की हक व स्वामित्व की ग्राम सिकोला जिला दुर्ग स्थित भूमि खसरा नं. 28/41 रकबा 0.194 हेक्टेयर भूमि को कूटरचित व फ र्जी मुख्तयार नामा के जरिए छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता की धारा 178 क बंटवारा करने हेतु श्रीमती दिलजीत कौर चाने की जानकारी के बिना आवेदन पत्र प्रस्तुत कर संपूर्ण कार्यवाही स्वयं खास मुख्तयार की हैसियत से करते हुए उपरोक्त खसरा नंबर की भूमि का आवेदन पत्र – अपने स्वयं के नाम पर तथा नाममात्र की भूमि श्रीमती दिलजीत कौर चाने के नाम पर अवैधानिक तरीके से दर्ज करवाकर बंटवारा करा लिया गया है। जिसमें श्रीमती दिलजीत कौर चाने की ओर से खास मुख्तयार की हैसियत से आदेश 18 नियम 4 व्य. प्र. सं. का शपथ पत्र उक्त कार्यवाही के अनुसार बंटवारा का आदेश दिनांक 4 मई 2026 पारित करते हुए फ र्द बंटवारा निष्पादित कर भूमि का पृथक पृथक ऋण पुस्तिका बनाने का आदेश दिया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि तथाकथित बंटवारा हेतु प्रस्तुत आवेदन पत्र में इस बात का कोई उल्लेख नही है कि-श्रीमती दिलजीत कौर चाने एवं प्रविन्दर सिंह चाने के मध्य पूर्व में कोई मौखिक बंटवारा नही हुआ था और ना ही मौखिक बंटवारा के अनुसार दोनो उक्त भूमि पर काबिज है और तो और उक्त आवेदन पत्र में श्रीमती दिलजीत कौर चाने एवं प्रविन्दर सिंह चाने कितने कितने भूमि पर काबिज हैं इसका उल्लेख नहीं है और ना ही आवेदन पत्र में है और ना ही तथाकथित दोनो शपथ पत्र में है। इससे स्पष्ट है कि न्यायालय के समक्ष प्रविन्दर सिंह चाने द्वारा श्रीमती दिलजीत कौर चाने से सही तथ्यों को छिपाकर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर कब्जा के आधार पर आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था। संपूर्ण प्रकरण में कही मी आवेदक के रूप में दिलजीत कौर चाने के हस्ताक्षर नहीं है और ना ही बंटवारा में दिलजीत कौर चाने के हस्ताक्षर है फिर भीन्यायालय को गुमराह कर और कूटरचित दस्तावेज का निर्माण कर श्रीमती दिलजीत कौर चाने की जमीन को हड़पने की नीयत से अपने नाम पर दर्ज करा लिया गया है।,
यहाँ यह भी स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि यदि श्रीमती दिलजीत कौर चाने एवं प्रविन्दर सिंह चाने के मध्य प्रश्नाधीन भूमि के संबंध में कोई बटवारा हुआ होता तो श्रीमती दिलजीत कौर चाने के सभी पुत्र पुत्रियों के मध्य संपत्ति का बटवारा हुआ होता श्रीमती दिलजीत कौर चाने के प्रविन्दर सिंह चाने के अतिरिक्त दो अन्य पुत्र कुलविन्दर सिंह एवं हरविन्दर सिंह तथा पुत्री रजविन्दर कौर भी है उन्हें भी बटवारे में संपत्ति दिया गया होता परन्तु प्रविन्दर सिंह चाने द्वारा उपरोक्त सभी तथ्यों को छिपाकर न्यायालय के समक्ष यह कथन किया है कि उसके अलावा श्रीमती दिलजीत कौर चाने के अन्य कोई वारिस नही है जिसका उल्लेख न्यायालय के आदेश पत्र में भी है।
जबकि पूर्व में इसी प्रविन्दर सिंह चाने द्वारा ग्राम सिकोला स्थित भूमि खसरा नम्बर 28/13 रकबा 0.1900 हेक्टेयर भूमि के नामांतरण हेतु इसी तहसीलदार के न्यायालय में आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था और आवेदन पत्र के साथ अपने स्वयं का शपथपत्र और गवाह धर्मेन्द्र कुमार मेश्राम का शपथपत्र प्रस्तुत किया था उसमें प्रविन्दर सिंह चाने के द्वारा यह स्पष्ट रूप से कथन किया है कि रणवीर सिंह चाने के विधिक वारिसान दलजीत कौर, भाई कुलविन्दरप्रीत सिंह उक्त प्रकरण में तत्कालीन तहसीलदार के द्वारा दिनांक 28/12/2024 को आदेश पारित करते हुए उपरोक्त भूमि पर दलजीत कौर प्रविन्दर सिंह एवं कुलविन्दरप्रीत सिंह का नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया है उस प्रकरण में भी प्रविन्दर सिंह के द्वारा झूठा कथन किया गया था कि स्वर्गीय रणवीर सिंह चाने के मात्र दलजीत कौर कुलविन्दरप्रीत सिंह एवं प्रविन्दर सिंह ही वारिस है जबकि स्वर्गीय रणवीर सिंह चाने का एक अन्य पुत्र हरविन्द्रर सिंह एवं पुत्री राजविन्दर कौर भी है जिसे कपटपूर्वक छुपा लिया गया है।
इससे स्पष्ट है कि प्रविन्दर सिंह चाने द्वारा न्यायालय में झूठा शपथपत्र देकर झूठा कथन किया गया है जबकि उपरोक्त भूमि खसरा नं. 183 स्वर्गीय रणवीर सिंह चाने के हक स्वामीत्व की थी तथा उनके मृत्यु पश्चात् सभी वारिसानों पुत्र पुत्री एवं पत्नि का स्वर्गीय रणवीर सिंह चाने के संपत्ति पर समान हक व हिस्सा है परन्तु उक्त सही तथ्यों को छिपाकर व कूटरचना कर प्रविन्दर सिंह चाने द्वारा धोखाधडी की गई है तथा न्यायालय के समक्ष किसी शिवम रैकवार आ. राजकुमार रैकवार निवासी-हनुमान मंदिर के पीछे बांसपारा दुर्ग को गवाह बनाकर सही तथ्यों को छुपाकर झूठा शपथपत्र पेश किया है। इस संबंध में यह स्पष्ट है कि श्रीमती दिलजीत कौर चाने ने दिनांक 29/09/2025 का कोई खाता बटवारा के धारा 178 भूराजस्व संहिता के आवेदन में हस्ताक्षर नही किया है और ना ही भूमि खसरा नं. 28/41 के कार्यवाही में बी.आर. ताम्रकार व सहयोगी अधिवक्ता को वकालतनामा भी हस्ताक्षर करके नही दिया है इसी तरह उसी नामांतरण प्रकरण में प्रस्तुत श्रीमती दिलजीत कौर चाने का शपथपत्र दिनांक 21/11/2025 भी कूटरचित व फर्जी है जिसमें श्रीमती दिलजीत कौर चाने के हस्ताक्षर नही है और ना ही श्रीमती दिलजीत कौर चाने दिनांक 13/10/2025 को तहसील कार्यालय उक्त आवेदन प्रस्तुत करने दुर्ग भी नही आयी थी इस प्रकार स्पष्ट है कि भूमि खसरा नं. 28/41 के कार्यवाही में श्रीमती दिलजीत कौर चाने के स्थान पर किसी अन्य नकली व्यक्ति को खडा कर नामांतरण, आवेदन, शपथपत्र, वकालतनामा में छद्म व्यक्ति का हस्ताक्षर कराकर कूटरचना कर दुरूपयोग किया व फर्जी बटवारा का आदेश पारित करा लिया जो कि बी.एन.एस. की धारा 318(4),335,337,338,340 के तहत दण्डनीय अपराध है।
इसमें स्पष्ट रूप से प्रथमदृष्टि तत्कालीन तहसीलदार श्री प्रफुल्ल गुप्ता की संलिप्तता भी दर्शित हो रही है क्योंकि पूर्व के प्रकरण में इसी तहसीलदार महोदय द्वारा स्वर्गीय रणवीर सिंह चाने के अन्य वारिसानों का नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया था परन्तु खसरा नं. 183 के प्रकरण में प्रविन्दर चाने के द्वारा केवल दिलजीत कौर एवं स्वयं को वारिस होना कथन किया है जबकि तहसीलदार के अभिलेख में पूर्व से ही रणवीर सिंह चाने के वारिसों की जानकारी थी ।
उपरोक्त सभी तथ्यों की पुष्टि इस बात से भी होता है कि स्वर्गीय समवीर सिंह चाने की मृत्यु के पश्चात् सिकीला स्थित भूमि खासरा नं. 28/41 के फौती दर्ज करने हेतु प्रवीन्दर सिंह चाने के द्वारा तहसीलदार दुर्ग के न्यायालय में आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था तथा अपना तथा नया धर्मेन्द्र कुमार नाम का शपथपत्र दिया था जिसमें स्वर्गीय रणवीर सिंह चाने का मेरे अतिरिक्ता प्रवीन्दर सिंह चाने का कोई जीवित विधिक वारिसान नहीं है होना कथान किया गया है इससे स्पष्ट है कि पूर्ण रूप से कटकूटरचना करते हुए एक वृद्ध महिला एवं अन्य वारिसों के हिस्सी की हडपनी की नियत से कार्यवाही की गई है। श्रीमती दिलजीत कौर के द्वारा उपरोक्ता तथ्यों की जानकारी होने पर अनुविभागीय अधिकारी दुर्ग के न्यायालय में उपरोक्त बाडी कुटरचना के आधार पर प्राप्त किए गए दस्तावेजों के विरुद्ध अपील भी प्रस्तुत किया गया है तथा कूटरचित व फ र्जी हस्ताक्षरको हस्तलिपि विषयों के नमुने का हस्ताक्षर भी दिया है जिसकी जानकारी होने पर प्रविन्दर सिंह ने विकास राजपूत, शुभम राजपूत, एवं मनोज राजपूत, एवं गवाह के द्वारा श्रीमती दिलजीत कौर की उपरोक्त अपराधों की शिकायत नहीं करने और चुपचाप रहने की धमकी दी जा रही है जिसके डर से श्रीमती दिलजीत कौर द्वारा रिपोर्ट नही की गई। यह कि तहसील न्यायालय में पैशा भूमि खसरा नं. 28/41 में प्रस्तुत श्रीमती दिलजीत कौर चाने का कूटरचित हस्ताक्षर जिसमें श्रीमती दिलजीत कौर चाने के स्थान पर किसी अन्य ने किया है इसकी पुष्टि राईटिंंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट से सामने आ चुकी है। इस प्रकरण में कूटरचित दस्तावेज नोटरी से तैयार करवाकर पेश किया गया है। इस प्रकरण में शहर के एक बडे प्रापर्टी डीलर की सांठगांठ की भी एक बड़ी शिकायत हुई है जिसका खुलासा होना अभी बाकी है।




