- September 21, 2026
फर्जी बंटवारे से हासिल जमीन का अवैध प्लाटिंग कर विक्रय करहीडीह के दो खसरे में की गई धोखाधड़ी की जिलाधीश व एसपी से शिकायत

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
दुर्ग । फर्जी मुख्तयार नामा कूटरचित दस्तावेज और नामांतरण आवेदन के आधार पर बंटवारा कराकर बेशकीमती जमीन का वास्तविक मूल्य बिक्री पत्र पर नहीं दर्शाकर रजिस्ट्री करके शासन को स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क की क्षति पहुंचा कर उसे करोड़ों रुपए में अवैध प्लाटिंग करके बेचने का सनसनी खेज मामला सामने आया है। इस मामले में लाखन सिंह ने प्रमाणित दस्तावेजों के साथ जिलाधीश व जिला पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है और इस अपराधिक षडय़ंत्र में शामिल मालवीय नगर दीपक नगर निवासी प्रविन्दर चाने प्रापर्टी डीलर मनोज राजपूत शुभम राजपूत के विरुध्द कार्यवाही की मांग की है। शासन को क्षति पहुंचाने के साथ नियम व कानून के साथ खिलवाड़ के मामले में प्रशासन व पुलिस ने जांच शुरु कर दी है।
शिकायत के अनुसार ग्राम करहीडीह जिला दुर्ग स्थित भूमि खसरा नंबर 179 एवं 96 रकबा 0.2600 एवं 0.8900 हेक्टेयर का है। मालवीय नगर दीपकनगर निवासी श्रीमती दिलजीत कौर चाने पति स्व. रणवीर चाने के हक व स्वामित्व की जमीन को उनके पुत्र प्रविन्दर सिंह चाने ने अपनी माता को जानकारी दिए बिना ही स्वयं खास मुख्तयार की हैसियत से आवेदन देकर उक्त भूमि में नाम मात्र की भूमि दिलजीत कौर के नाम और शेष भूमि का फर्जी दस्तावेजों का उपयोगकर अपने नाम पर करा लिया। इसमें प्रविन्दर चाने ने कहा है कि उसके व दिलजीत कौर चाने के अलावा इस जमीन का कोई वारिस नहीं है। जबकि दिलजीत कौर चाने के पुत्र प्रविन्दर चाने के अतिरिक्त दो अन्य पुत्र कुलविन्दर सिंह एवं हरविन्दर सिंह तथा पुत्री रजविन्दर कौर भी है। संपत्ति के बंटवारे में उन तथ्यों को छिपाया गया है। जबकि ये संपत्ति में बराबर के हकदार हैं। इस मामले का सर्वाधिक दिलचस्प पहलू यह है कि खसरा नं- 96 एवं 179 के बंटवारे की कार्यवाही में दिलजीत कौर के नाम से लगाए गए शपथ पत्र नामांतरण आवेदन व वकालतनामा में कही भी दिल जीत कौर चाने के वास्तविक हस्ताक्षर नही है। ये सभी हस्ताक्षर कूटरचित व फर्जी है। यही नही कार्यवाही की प्रक्रिया में दिलजीत कौर चाने के स्थान पर किसी अन्य नकली महिला को खड़ा किया गया है और फर्जी बंटवारा का आदेश पारित करा लिया गया है जो बीएन एस की धारा 318(4) 335 337,338 व 340 के तहत दंडनीय अपराध है। शिकायत के अनुसार उस पूरे घटनाक्रम में प्रापर्टी डीलर मनोज राजपूत की मिलीभगत इस बात से प्रमाणित हो गई है कि गवाह व पहचान कर्ता बनकर शिवम रैकवार नामक जिस व्यक्ति ने शपथ पत्र पेश किया है वह मनोज राजपूत का ही खास आदमी है। फर्जी बंटवारे की कार्यवाही के बाद मनोज राजपूत एव शुभम सिंह राजपूत द्वारा खसरा नंबर 179/1 रकबा 0.3548 व 01100 एवं 01144 हेक्टेयर तथा खसरा नं. 96/1 रकबा 0.0397 व 0.0976 एवं 0.0423 हेक्टेयर भूमि को प्रविन्दर चाने से नाम मात्र का विक्रय प्रतिफल दर्शाते हुए क्रय किया गया है और इसका अवैध प्लाटिंग कर विक्रय किया जा रहा है। किसी भी बिक्री पत्र में बेशकीमती जमीन का वास्तविक मूल्य नही दर्शाने से शासन को स्टाम्प शुल्क व पंजीयन शुल्क से भी भारी क्षति पहुंचाई गई है। प्रविन्दर चाने द्वारा खसरा नं. 183 व 28/41 में भी कूटरचित दस्तावेज का इस्तेमाल कर यह कारनामा किया गया है। फर्जी बंटवारे के खेल में तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। शिकायत कर्ता लाखन सिंह ने राजधानी जाकर वित्तमंत्री ओ.पी. चौधरी से मुलाकात करके प्रमाणिक दस्तावेज सौंपकर घटना क्रम की जानकारी दी है।
इनके नाम पर हुई है जमीन की रजिस्ट्री
फर्जीवाड़े से हासिल की गई इस भूमिका घड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग कर के विक्रय का खेल जारी है। ले आउट डायवर्सन व कालोनाइजर लाइसेंस के बगैर अभी तक इस भूमि का टुकड़ों में जिन्हें विक्रय किया गया है उसमें खसरा नं. 96/1 रकबा 0.0397, 179/1 रकबा 0 .3548, 183/1 रकबा 0.0623 को 61 लाख 12 हजार में शुभम सिंह राजपूत खसरा नं. 96/2 रकबा 0.06 दलजीत कौर/जगत सिंह खसरा नं. 96/3 रकबा 0.0204 को 15 लाख में प्रकाश कुमार दुबे / राजकुमार खसरा नं. 96/4 रकबा 0.0206 खसरा नं. 179/10 रकबा 0.11 खसरा नं- 183/22 रकबा 0.0669 को 29 लाख 33 हजार में में शुभम राजपूत / लक्ष्मीनारायण खरा नं. 96/5 रकबा 0.0753 खसरा नं 179/11 रकबा 0.01144 को 28लाख 37 हजार में मनोज राजपूत पिता जवाहर सिंह राजपूत को खसरा नं. 96/5 रकबा 0.0223 को 16 लाख 75 हजार में स्वाति देशमुख पति पीएन देशमुख, खसरा नं: 96/7 रकबा 0.0217 को 16 लाख 35 हजार में हर्षवर्धन पिता सनमुख राव खसरा नं 96/7 रकबा 0.209 को 15 लाख 71 हजार में एस. श्रीनिवास राव, खसरा नं. 179/1 रकबा 0.3544 खसरा नंबर 96/1 रकबा 0.0397 खसरा नं. 183/1 रकबा 0.06234 को 61 लाख 12 हजार में शुभम राजपूत पिता लक्ष्मीनारायण खसरा नं-179/2 रकबा 0.16 दलजीत कौर पति जगत सिंह खसरा नं- 179/3 रकबा 0.0223 को 16 लाख 75 हजार में भानुमति साहू पति जागेश्वर साहू, खसरा नं. 179/4 रकबा 0.0204 को 23 लाख 10 हजार में ज्योति चौधरी खसरा नं. 179/5 रकबा 0.0223 को 16 लाख 75 हजार में जगदीश प्रसाद वर्मा, खसरा 179/6 रकबा 0.0206 को 15 लाख 50 हजार में लुकेश कुमार खसरा नं. 179/7 रकबा 0 .0223 को 16 लाख 75 हजार में रजिन्दर कौर पति गुरमिन्दर सिंह खसरा नं. 179/8 रकबा 0.0206 को 15 लाख 50 हजार में प्रशांत गूजन खसरा नं. 179/9 रकबा 0.223 को 16 लाख 75 हजार में सरोज शुक्ला पति रमेश कुमार खसरा नं. 179/10 रकबा 0.11, खसरा नं. 95/4 रकबा 0.0206 – खसरा नं. 183/22 रकबा 0.0669 को 29 लाख 33 हजार में शुभम राजपूत पिता लक्ष्मीनारायण तथा खसरा नं. 179/11, रकबा 0.1144 खसरा नं 96/5 रकबा 0.0753 को 28 लाख 37 हजार में मनोज गजपूत पिता जवाहर राजपूत के नाम रजिस्ट्री की गयी है रजिस्ट्री का सारा काम मई, जून 2026 में किया गया है। इस जमीन के अधिकांश हिस्से की रजिस्ट्री मनोज राजपूत व शुभम राजपूत के नाम पर है जिनके व्दारा अवैध प्लाटिंग कर विक्रय का काम जारी है।




