- September 23, 2026
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा छात्राओं से संवाद

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा छात्राओं से संवाद किया। NALSA SHIKSHA SCHEME 2026 से साइबर सुरक्षा और करियर तक, न्यायाधीशों ने कानून को जोड़ा युवा जीवन से
“अगर हमें अपने अधिकारों की जानकारी ही न हो, तो हम उनका इस्तेमाल कैसे करेंगे?” एक छात्रा का यह सवाल उस दिन के पूरे संवाद की दिशा तय करने के लिए काफी था। शासकीय प्री/पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास, दुर्ग में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में कानून किताबों और धाराओं तक सीमित नहीं रहा। वह छात्राओं की पढ़ाई, मोबाइल, ऑनलाइन शॉपिंग, सड़क सुरक्षा, करियर और उनके भविष्य से जुड़ता चला गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग के चार न्यायाधीश श्रीमती अंजली सिंह व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, श्रीमती महिमा शर्मा, सुश्री आरती ध्रुव तथा सुश्री प्रियंका गोस्वामी व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
“कानून हमारे लिए है” यहीं से शुरू हुआ संवाद
शिविर में NALSA SHIKSHA SCHEME, 2026 और Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 पर विशेष चर्चा हुई। छात्राओं को योजना और शिक्षा के अधिकार से जुड़े प्रावधानों की जानकारी केवल कानूनी भाषा में नहीं दी गई, बल्कि यह समझाने का प्रयास किया गया कि शिक्षा तक पहुंच, अवसर और अधिकार उनके वर्तमान और भविष्य से किस तरह जुड़े हैं। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य पात्र बच्चों को निजी गैर-अनुदान प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश प्राप्त करने में सहायता प्रदान करना है। योजना के अंतर्गत विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), वंचित समूह (DG), प्रवासी एवं अन्य संवेदनशील परिस्थितियों से जुड़े परिवारों तथा दिव्यांग बच्चों (CWD) पर विशेष ध्यान दिया गया है।
शिविर में बताया गया कि योजना का उद्देश्य केवल बच्चों एवं उनके अभिभावकों को उनके अधिकारों की जानकारी देना नहीं है, बल्कि पात्र बच्चे को उसके अधिकार के वास्तविक लाभ अर्थात प्रवेश प्राप्त होने तक तथा प्रवेश के बाद भी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत पात्र बच्चों की पहचान, पात्रता संबंधी मार्गदर्शन, आवश्यक दस्तावेज तैयार करने में सहायता, ऑनलाइन आवेदन करने में सहयोग, विद्यालय के चयन की प्रक्रिया समझाना, आवेदन की स्थिति की जानकारी प्राप्त करना, लॉटरी/आवंटन की जानकारी देना तथा विद्यालय में प्रवेश की औपचारिकताएं पूर्ण कराने में सहायता प्रदान की जाएगी।
PLV होंगे परिवारों के लिए प्रथम संपर्क बिंदु
योजना के क्रियान्वयन में पैरा-लीगल वालंटियर्स (PLVs) की महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित की गई है। PLVs पात्र परिवारों को योजना की जानकारी देने, पात्रता समझाने, दस्तावेजों की तैयारी, ऑनलाइन आवेदन, विद्यालय चयन, आवेदन की स्थिति जानने तथा आवश्यकता होने पर शिकायत संबंधी सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगे। विशेष रूप से ऐसे परिवारों तक पहुंचने पर ध्यान दिया जाएगा जो डिजिटल सुविधाओं अथवा डिजिटल जानकारी से वंचित हैं।
पूरे वर्ष चलेगी विधिक जागरूकता एवं आउटरीच गतिविधियां
योजना के अंतर्गत जागरूकता गतिविधियों को केवल प्रवेश के समय तक सीमित नहीं रखा गया है। पूरे वर्ष गांव, वार्ड एवं समुदाय स्तर पर विधिक जागरूकता शिविर, ग्राम सभा, पंचायत, आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल, विधिक सहायता क्लीनिक आदि के माध्यम से लोगों को जानकारी प्रदान की जाएगी। प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने से पूर्व विशेष Pre-Admission Awareness Drive भी आयोजित की जाएगी, ताकि पात्र बच्चों की समय रहते पहचान हो सके और उनके परिवार समय पर आवेदन कर सकें।
मोबाइल की स्क्रीन से लेकर साइबर सुरक्षा तक
आज की युवा पीढ़ी के लिए डिजिटल दुनिया जिंदगी का हिस्सा है। लेकिन जहां सुविधा है, वहां सावधानी भी जरूरी है। शिविर में साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ी धोखाधड़ी पर विशेष रूप से चर्चा की गई। अनजान लिंक पर क्लिक न करना, गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करना, संदिग्ध संदेशों और ऑनलाइन लेन-देन में सावधानी बरतना—इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों के बारे में छात्राओं को जागरूक किया गया।
अगला सवाल था “हम अपने भविष्य के लिए क्या करें?”
विधिक जागरूकता का यह संवाद केवल अधिकारों तक नहीं रुका। न्यायाधीशों ने छात्राओं से करियर निर्माण को लेकर भी संवाद किया। उन्हें शिक्षा को अपने भविष्य की मजबूत आधारशिला बनाने, अपने लक्ष्य तय करने और उपलब्ध अवसरों का समझदारी से उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
और फिर शुरू हुआ सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सवाल
कार्यक्रम का माहौल तब और जीवंत हो गया, जब छात्राओं ने विभिन्न कानूनी और सामाजिक विषयों पर न्यायाधीशों से सवाल पूछने शुरू किए। सवाल अलग-अलग थे, लेकिन उनमें एक बात समान थी – जानने की जिज्ञासा। न्यायाधीशगण ने छात्राओं के प्रश्नों का सरल, सहज और स्पष्ट शब्दों में उत्तर देकर उनका मार्गदर्शन किया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग का यह प्रयास छात्राओं तक कानून की जानकारी पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और भविष्य के प्रति अधिक जागरूक बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया।




