• September 29, 2026

8 हजार वर्गफीट भूमि पर व्यवसायिक काम्प्लेक्स का अवैध निर्माण जमीन कारोबारी मनोज के खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत

8 हजार वर्गफीट भूमि पर व्यवसायिक काम्प्लेक्स का अवैध निर्माण जमीन कारोबारी मनोज के खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

 

दुर्ग । गरीब व मध्यम वर्ग से जुड़े छोटे से अवैध निर्माण के मामले में प्रशासन व नगर निगम नियम व कानून का हवाला देकर तुरंत तोडफ़ ोड़ की कार्यवाही करता है लेकिन जब मामला किसी रसूखदार या आर्थिक रूप से संपन्न से जुड़ा हो तो कार्यवाही के नाम पर शासन प्रशासन नगर निगम के साथ सरकार के भी हाथ पांव फू ल जाते है। दुर्ग-राजनांद गांव बायपास रोड पर मनोज लेआउट पिछले कई वर्षो से अवैध निर्माण को लेकर सुर्खियों में है लेकिन इस मामले में अभी तक कोई कार्यवाही नही की गई है। डियरा पारा निवासी लाखन सिंह ने इस मामले की प्रमाणिक दस्तावेज के साथ मुख्य मंत्री विष्णुदेव साय से बिन्दुवार शिकायत की है और अवैध निर्माण को तोड़े जाने का अनुरोध किया है।
शिकायत के अनुसार नेहरू नगर पश्चिम भिलाई निवासी मनोज राजपूत पिता जवाहर सिंह राजपूत द्वारा दुर्ग राजनांदगांव बायपास रोड के समीप मनोज लेआउट के भीतर ग्राम सिकोला जिला दुर्ग की भूमि खसरा नंबर 1/2 में नगर निगम से अनुमति लिए बिना लगभग आठ हजार वर्गफीट की जमीन पर पांच मंजिला अवैध व्यवसायिक काम्प्लेक्स का निर्माण कर लिया गया है। जमीन कारोबारी मनोज राजपूत द्वारा उक्त पूरा निर्माण कृषि भूमि पर किया गया है। कृषि भूमि पर यह निर्माण जमीन का व्यपवर्तन व डायवर्सन के बिना किया गया है इसलिए यह पूरी तरह से अवैध है यह और छत्तीसगढ़, भू- राजस्व संहिता की धारा 172 तथा ग्राम निवेश अधिनियम का खुला उलंघन है। साठ हजार वर्ग फीट पर पांच मंजिला व्यवसायिक काम्पलेक्स शादी भवन का निर्माण 40 हजार वर्ग फीट के अवैध निर्माण की परिधि में आता है।

अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया है फैसला
माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिसंबर 2024 में राजेन्द्र बडज़ात्या विरुध्द उत्तर प्रदेश आवास निगम विकास परिसर तथा वर्ष 2026 में कनिज अहमद विरुध्द साबुददीन के एतिहासिक फैसले में कहा गया है कि जो व्यक्ति भवन अधिकारी या सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना आवासीय या व्यवसायिक निर्माण करता है वह कानून को अपने हाथ में ले लेता है ऐसा पूरा निर्माण अवैध निर्माण कहलाता है। ऐसा व्यक्ति किसी भी तरह की दया की पात्रता नहीं रखता। ऐसा अतिक्रमणकारी / अवैध निर्माणकारी यह बचाव भी नहीं ले सकता कि उसने काफ ी पहले यह निर्माण किया है तथा ऐसे निर्माण को तोड़कर ध्वस्त करने में नगर निगम ने या सक्षम अधिकारी ने कोई गलती नही की है। शासन कलेक्टर नगर निगम आयुक्त का यह नैतिक दायित्व व कर्तव्य है कि जब उसके पास कोई भी व्यक्ति उनके क्षेत्र में संबंधित ऐसे गंभीर अवैधानिक कृत्य की शिकायत करता है तो उस पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए सुुप्रीम कोर्ट द्वारा यह भी कहा गया है कि जो अधिकारी अवैध निर्माण को प्रोत्साहन देता है वह भी उतना ही जवाबदार है।

क्या कहता है नगर पालिक अधिनियम
इस संबंध में शिकायतकर्ता ने ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा है कि नगर पालिक अधिनियम की धारा 307 ऐसा निर्माण कार्य हटाने या उसमें परिवर्तन करने के संबंध में आदेश देने की शक्ति, जो उप-विधियों या किसी योजना या किसी अन्य मांग के अनुरूप न हो- (1) यदि किसी भवन का निर्माण या पुनर्निर्माण धारा 291 के अधीन उल्लिखित किसी नगर निर्माण या धारा 427 के अधीन बनाई गई किन्हीं भवन संबंधी उप-विधियों के उल्लंघन में किया जाये, तो आयुक्त, उक्त उल्लंघन के संबंध में किसी अर्थदण्ड के विषय में कार्यवाही करने के अपने स्वत्व को हानि पहुंचाए बिना, सूचना पत्र द्वारा, स्वामी को, उक्त कार्य को या तो गिराने के लिए या हटाने के लिए या यदि वह ऐसा चाहे उसमें ऐसे परिवर्तन करने के लिए आदेश दे सकेगा जो उसे उक्त योजना या उप-विधियों के अनुरूप करने के लिए आवश्यक हो। (2) यदि किसी भवन का (अ) किसी ऐसी स्वीकृति के बिना, जो धारा 293 (1) द्वारा अपेक्षित हो. या (आ) उस दशा में जब स्वीकृति देने से इन्कार कर दिया गया हो या (इ) प्रदान की गई किसी स्वीकृति के निर्बन्धनों के उल्लंघन में, या (ई) उस दशा में जब धारा 300 के अधीन स्वीकृति समाप्त हो गई होनिर्माण या पुनर्निर्माण किया जावे तो आयुक्त, जब तक कि वह धारा 294 के अधीन ऐसे भवन या कार्य के संबंध में कार्यवाही करना आवश्यक न समझे (अ) लिखित सूचना-पत्र द्वारा ऐसे व्यक्ति से जो ऐसे भवन का निर्माण कर रहा हो या ऐसे कार्य का निष्पादन कर रहा हो या जिसने ऐसे भवन का निर्माण कर लिया हो या ऐसे कार्य का निष्पादन कर लिया हो ऐसे दिनांक को या उसके पूर्व जो कि सूचनापत्र में निर्दिष्ट किया जाए यह मांग करेगा कि वह, उसके द्वारा या इस संबंध में उसके द्वारा विधिवत प्राधिकृत कार्य प्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षरित तथा आयुक्त को संबोधित लिखित वृत्तान्त-पत्र द्वारा इस बात का पर्याप्त कारण बतलावे कि क्योंकि न ऐसा भवन या कार्य हटा दिया जाए, परिवर्तित कर दिया जाए, या गिरा दिया जाए, या (आ) उक्त व्यक्ति को ऐसे दिन तथा ऐसे समय तथा स्थान पर, जैसा कि ऐसे सूचना-पत्र में निर्दिष्ट किया जाए, व्यक्तिगत रूप से या इस संबंध में उसके द्वारा विधिवत प्राधिकृत कार्य-प्रतिनिधि द्वारा उपस्थित होने और इस सबता का पर्याप्त कारण बतलाने का आदेश देगा कि क्यॉन ऐसा भवन या कार्य हटाया जाए, परिवर्तित किया जाए या गिराया जाए।


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