• January 16, 2026

भिलाई के स्टेट कैपिटल रिजन में शामिल होने के बाद कोहका में बढ़े जमीनों के दाम, एग्रीकल्चर लैंड की कीमत प्रति एकड़ ढाई करोड़ से बढ़कर 5 करोड़ पहुंची, बिल्डर्स और डेवलपर्स कर रहे कोहका का रुख

भिलाई के स्टेट कैपिटल रिजन में शामिल होने के बाद कोहका में बढ़े जमीनों के दाम, एग्रीकल्चर लैंड की कीमत प्रति एकड़ ढाई करोड़ से बढ़कर 5 करोड़ पहुंची, बिल्डर्स और डेवलपर्स कर रहे कोहका का रुख

ट्राई सिटी एक्सप्रेस। न्यूज

 

 

रायपुर।

जमीन खरीदी-बिक्री को लेकर शासन ने नई कलेक्टर गाइड लाइन 20 नवंबर से लागू कर दी है। अब नई दर से ही जमीन, मकान और फ्लैट की खरीदी-बिक्री की जाएगी। इस वजह से शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्र की जमीन का सरकारी मूल्य काफी बढ़ गया है। जमीन की नई दरों और रायपुर से भिलाई-दुर्ग तक स्टेट कैपिटल बनाए जाने की सरकार की योजना को लेकर बिल्डर्स और डेवलपर्स ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। इसका सबसे ज्यादा असर कोहका, कुम्हारी और भिलाइबके कोहका में देखा जा रहा है। वजह यह है कि चरोदा से पावर हाउस तक रेलवे और बीएसपी की जमीन है। नियंत्रण भी उन्हीं का ज्यादा है। रायपुर में जमीन की कीमतें पहले ही बढ़ी हुई है। इस वजह से रायपुर के ज्यादातर लोग भिलाई का रुख कर रहे हैं। इसे भांपते भूमाफिया और डेवलपर्स यहां सक्रिय हों गए हैं। वे कोहका को टारगेट कर रहे हैं। इस वजह से जमीन के दाम बढ़ रहें हैं। जमीन की नई दरों के कारण अवैध प्लाटिंग भी नहीं के बराबर हो गई है। ऐसे में बाहर के जमीन के बड़े कारोबारी यहां निवेश की फिराक में हैं। दुर्ग जिले की बात करें तो मुख्य मार्ग से लगे नगरीय निकाय क्षेत्र के जमीनों के मूल्य में औसतन 19.25 प्रतिशत और मुख्य मार्ग के अंदर की भूमि का दर 21.25 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र की जमीन जो मुख्य मार्ग से लगी है, उसके मूल्य में 117% और मुख्य मार्ग से अंदर सिंचित भूमि का 114% हेक्टेयर दर लागू किया गया है।

कोहका में एक करोड़ प्रतिएकड़ बिकने वाली कृषि जमीन के दाम हो गए पांच करोड़

कोहका में जो जमीन औसत 1500 रुपए वर्गफिट में बिक रही थी। उसकी कीमत 3 हजार के पार पहुंच गई है। यह उछाल महज सालभर में देखने को मिली है। जमीन का सरकारी मूल्य बढ़ने से अब खरीदी-बिक्री में रजिस्ट्री चार्ज भी बढ़ जाएगा। इतना ही नहीं कृषि जमीन के दाम में भी बढ़ोत्तरी हुई है। पहले जिस जमीन की कीमत करीब 1 करोड़ रुपए थी, वह अब 5 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इस प्रकार कोहका में जमीन कारोबारियों की पहली पसंद हो गई है। इसका सबसे ज्यादा असर दुर्ग​-भिलाई और रिसाली क्षेत्र के कसारीडीह, बोरसी, कुरूद, कोहका, प्रगति नगर क्षेत्र में पड़ा है। दुर्ग के कसारीडीह में पहले सड़क से लगी जमीन की कीमत 19500 और अंदर की जमीन का मूल्य 16200 रुपए वर्ग मीटर था। इसे बढ़ाकर क्रमश: 45 हजार और 24000 रुपए वर्ग मीटर कर दिया गया है। इसी तरह कोहका के फरीदनगर, रानी अवंती बाई, पुरानी बस्ती, शांति नगर, अंबेडकर नगर वार्ड 11 में पहले 51 कंडिका थी। यानी अलग-अलग कंडिका में अलग-अलग मूल्य था।

कोहका रहवासी क्षेत्र के लिए बना पहली पसंद

अधिकारियों ने बताया कि जिन सड़कों की चौड़ाई 20 से 30 मीटर है, वहां कारोबार करने वाले व्यापारियों को सबसे अधिक 6 रुपए प्रति वर्ग फीट की दर से ट्रेड लाइसेंस शुल्क देना होगा। इसमें पावर हाउस से नंदिनी रोड, टोल प्ला प्लाजा मेन रोड, निगम मुख्यालय से सुपेला घड़ी चौक, मौर्या चौक से निगम मुख्यालय, छावनी चौक से तिरंगा चौक, खुर्सीपार चौक से राम्हेपुर, खुर्सीपार दीनदयाल मार्केट और सद्भावना चौक से इंदिरा चौक जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं। वहीं नेहरू नगर, स्मृति नगर, सुपेला और वैशाली नगर क्षेत्रों में स्थित दुकानों के लिए 5 रुपए प्रति वर्ग फीट की दर निर्धारित की गई है। जिन इलाकों की सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं, यानी 7.5 मीटर से कम चौड़ी, वहां शुल्क और कम रखा गया है। जुनवानी, खम्हरिया, प्रियदर्शिनी परिसर, ग्रांड ढिल्लन, गदा चौक से निजामी चौक और आर्य नगर क्षेत्र के व्यापारियों को 4 रुपए प्रति वर्ग फीट की दर से लाइसेंस शुल्क देना होगा।


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